पुरुष के हिस्से आई!

  1. सिर से उड़ते बाल और गंजा होता सिर
  2. रंग पहचानने की कमी कलर ब्लाइंडनेस
  3. पुरुष को रोने की अनुमति नहीं है
  4. नशे की लत – यदि अनुशासित स्व- नियंत्रण न हो तो तंबाकू, शराब और ड्रगस्टोर के आदी होने में पुरुष को देर नहीं लगती है
  5. राजनीति के खेल और खेल की गतिविधि को आसानी से आकर्षित होते हैं
  6. यौन क्रिया की अतिशय इच्छा
  7. और लिंग उत्थान की समस्या
  8. एक ही रंग के शेड्स में अंतर करने में संशयता और अक्षमता
  9. अहंकार और क्रोध की प्रचुरता

पृथ्वी के विभिन्न जीवो में मानव जीवन को सर्वोत्तम माना जाता है जो मानव के लिए अनिवार्य बंधन है. ये मानव अपने सिवा किसी और सहजातीय और सहजीवन में उत्तम सोचता ही नहीं. कभी सोचा है कि पुरुष और स्त्री के निर्माण में प्रकृति ने दोनों को एक दूसरे का पूरक बनाया है और परिवार रचना करते समय तमाम शक्तियों की मात्र पुरुष में अधिक प्रतीत होती है जबकि स्त्री में सहनशीलता की शक्ति अतुलनीय है. फिर पुरुष अपने मांसपेशियों के बल पर स्त्री पर हावी होने के अनादिकाल से पीड़ित है.

कभी सोचा है पुरुषों को भी सीमित करने के लिए प्रकृति उसे किन किन परिस्थितियों से अलंकृत किया है.

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