मेरे गाँव क्यारीपुरा से बचपन के दिनों में की गयी यात्रा के संदर्भ में मेरी अनमोल यादें सुरक्षित है. मेरे ग्रैंड फादर यानी दादा जी के साथ बिताए हुए पल ना केवल मेरे जीवन की अनमोल धरोहर हैं बल्कि जीवन का पाठ और शिक्षण भी है. साधु व्यक्तित्व के संग बिताए क्षण जब मैं पुनः स्मरण करता हूँ तू द्रवित भी हो जाता हूँ. वे 1 साधारण किसान थे जो थोड़ा व्यवसाय कर घोड़े बेचने और घी के व्यवसाय में संलिप्त थे परंतु जब वे एक धार्मिक और प्राकृतिक न्याय के व्यक्तित्व के धनी थे.
आध्यात्मिक चिंतन के पुरोधा थे तथा गाँव गाँव की पुरखा होने के साथ साथ जिनकी कहे हुए सभी लोग न केवल मान करती थी बल्की स्वीकार कर उस अनुसार निर्णय अनुसार कार्य करने को उद्धृत होते थे.
मुझे उनकी बात याद आती है वे कोई ऐसा मंत्र जानते थे जिसमें किसी भी स्त्री के आँचल क्षेत्र में गाँठ हो जाए और उन तक ख़बर पहुँचे कि वह इस तरह के रोग से ग्रसित है तो वे एकांत में बैठकर दायीं या बायीं ओर के स्तन में गठन की जानकारी लेकर अपने सीने पर हाथ रख निप्पल के चारों तरफ़ उंगलियों को घुमाते हुए ये मंत्र पढ़ते थे इससे दो सप्ताह में वह गठान गल जाती थी.
विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र का छात्र होने के कारण यहाँ बात न तो अब समझ जाती है न अस्वीकार योग्य लगती है परंतु लगभग सौ प्रतिशत प्रकरणों में रोगी द्वारा आठ दस दिन में यह सूचना भिजवा दी जाती थी कि आराम हो गया और गठान गल गई.
इस मंत्रा के उच्चारण में एक ही अनिवार्यता होती थी कि मंत्रा चिकित्सा शास्त्री और रोगी के मुद्दे नदी नहीं होना चाहिए और यदि नदी है तो नदी के इस पार उस रोगी को लाना होगा.
है न आश्चर्य का विषय है जो मैंने अपनी आँखों से देखा है. इसी प्रकार गाँव में मेरे घर के सामने दालान में एक देशी कुत्ते को बिच्छू ने डंक को मार दिया. शाम का समय था और मेरे देखने योग्य दृश्य था की उस पालतू श्वान की व्यथा व्याकुलता अति असहनीय स्तर पर थी और वह अपनी स्थान पर उछल उछल कर विष का दर्द बयान रहा था.
तभी मेरे दादा जी 1 लकड़ी उठायी उस पर 1 रस्सी बाँधी और दोनों ओर से बाँध कर उस कुत्ते को गर्दन से बढ़कर मंत्र पढ़ते हुए उस लकड़ी और रस्सी के बीच से सात बार निकाल दिया और मेरी आँखों के सामने कुत्ता कूँ कूँ करते हुए कोने में जाकर बैठ गया. तब मैं स्कूल में पढ़ता था मेरे लिए ये कोई आश्चर्य से कम न था.
मंत्र चिकित्सा के द्वारा त्वरित उपचार संभव था.

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