✔️साठ का पाठ
अब आज साठ के हैं
तो आकांक्षा शेष नहीं
धन तत्व एकत्र करते हैं
तो अभिलाषा शेष नहीं
अब आज क्रशकाय हैं
तो भागम-भाग शेष नहीं
समेटा करने की सोचो
तो शक्ति प्रबल शेष नहीं
अब आज अस्थि भंगुर है
और मोहब्बत शेष नहीं
यादें कुरेदते रहो यूं
कि उर्जा समर्थ शेष नहीं
अब आज ऐसे अकेले हैं
जहां जीवंत रिश्ते शेष नहीं
अफसोस,क्षमा,दोष यहां
आरोपों की झड़ी शेष नहीं
अब आज ऐसी तैयारी है
बहुत समय शेष नहीं
घर वापसी की जो सोचो
तो जीने की चाह शेष नहीं

अनिल कुंमार भदौरिया पेशे से चिकित्सक है और मध्य प्रदेश शासन में सेवारत हैं.
स्वास्थ्य शिक्षा के संबंध में चिकित्सक भदौरिया की विशेष रुचि है और जीवनशैली रोगों के प्रभावी उपचार के साथ फर्स्ट एड, यौन शिक्षा व CPR के प्रशिक्षण सत्रों में भी सम्मिलित रहते हैं.
सेक्स एजूकेशन नामक पुस्तिका प्रकाशित हो चुकी है. कवि हृदय डॉ. भदौरिया अपने यात्रा वृत्तान्त और कहानियों के संग्रह की तीन अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं. हेल्दी-बुक नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है.
- Sex Education by Peacock Books
- दृष्टिदृश्य दृष्टा देवांश – पद्य संग्रह
3.अथ कथा यात्रायाम – गद्य कथा संग्रह
- सेक्स शिक्षा – हिंदी में यौन शिक्षा
- ज़मीन पर मेरे कदम – यात्रा वृतांत
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