मधुमेह के रोगी – कैसे करें पैरों की देखभाल
डा अनिल कुमार भदोरिया फिजिशियन
पूर्व अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (2023), इंदौर
मधुमेह का जड़ से निर्मूल करने योग्य उपचार संभव नहीं है ओर यह रोग अपनी लम्बी रोग अवस्था में सभी अंगों पर विपरीत प्रभाव प्रस्तुत करता है. मधुमेह की विभिन्न अवस्थाओं में पैर के पंजों की संवेदना कम हो कर समाप्त हो सकती है जो रक्त में शक्कर के उच्च स्तर के बने रहने पर स्नायु तंत्र ओर रक्त प्रदाय तंत्र को विपरीत रूप से प्रभावित करने के कारण होती है.
सामान्यतः मधुमेह रोगी अपने पैर के पंजों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते हैं तथा मधुमेह पुराना हो तो दर्द का अहसास भी नहीं होने पाता है. यही अवहेलना पंजों में चोट का कारण बनती है और छोटी सी चोट भी संक्रमण को बढ़ाकर संवेंदन शून्यता पैदा कर सकती है जो छोटी चोट को भी घाव में बदल देती है जिसके कारण अंगुली, पंजे और पांव के निचले हिस्से सड सकते हैं. ऐसी अवस्था में अंतिम तौर पर उपाय का एकमात्र रास्ता यही रह जाता है कि सड़ते हुए अंग को काटकर अलग किया जाए ताकि बीमारी आगे न बढे और प्राण रक्षा भी हो सके.
प्रश्न यह उठता है कि पैरों की सुरक्षा कैसे की जा सकती है?
अपने पैर और पंजों की जाँच आम तौर पर नहाते समय की जा सकती है। पैरों की उंगलियों के बीच की जगह का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. त्वचा पर कहीं कोई छाला, स्क्रैच, क्रैक या त्वचा के रंग में बदलाव तो नहीं है?
पैर की एड़ी में होने वाले फिशर या क्रेक से बचने के लिए गुनगुने से गर्म स्तर के पानी में ईडी को रखने का यदा कदा श्रम चाहिए।
गर्म पानी का तापमान अपनी कोहनी पर जांचने के बाद एड़ी को उस पानी में डुबो कर रखने से त्वचा नर्म हो जाएगी. बाद में एड़ी के कठोर क्षेत्र को नरम तौलिए से अथवा नहाने के म्रदु साबुन से घिस कर धो लेना चाहिए।
पूर्णतः सूखने के बाद एड़ी के चारों ओर नारियल या सरसों का तेल या कोई मॉइस्चराइजर क्रीम लगाना सुरक्षित होता है.
अत्यधिक गर्मी, अत्यधिक ठंडे तापमान से बचना है। उसी प्रकार गर्म एवं तेज धूप की अवस्था में नंगे पांव न चलने की सलाह दी जाती है।
यहाँ तक कि धर्म स्थल जैसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा अथवा सड़क पर या फुटपाथ पर नंगे पैर चलने की सलाह नहीं दी जाती है।
बाग बगीचे में भी घास पर नंगे पैर चलने के पहले सतह की सरलता की तथा नुकीले पत्थरों की जांच कर ली जानी चाहिए ताकि पांव में कोई घाव न बनने पाए।
रात में यदि पैरों में अधिक ठंड लगे तो कॉटन या उन्हीं जुराबें पहन लेनी चाहिए।
हमेशा सही तौर पर फिर होने वाली 100 % कॉटन की जुराबें प्रयोग में लाना चाहिए।
प्रयास यह होना चाहिए कि चप्पल/सैंडल पहनने से बेहतर चमड़े के या कैनवास के खेलकूद वाले जूते पहने जाएं ताकि पैरों के चोट की संभावना शून्य स्तर पर पहुँच जाए।
जूते पहनने के पूर्व, सदैव जांच कर लेना चाहिए कि जूते में कहीं कोई बारीक कंकड़, पत्थर, सूत इत्यादि भीतर ना हो जो निरंतर पैदल चलने या दौड़ने में पैर की त्वचा को आघात पहुंचा सके।
जूते मोजे उतारने के बाद पैरों की जांच करें कि कहीं पैर की त्वचा में कोई घाव तो नहीं उत्पन्न हो गया है।
याद रखें मधुमेह पूर्णतः ठीक होने वाला रोग नहीं है परंतु इसका प्रभावी नियंत्रण से जटिल स्थितियों का बचाव ओर उपचार संभव है और समुचित नियंत्रण ही उपचार है. रक्त में शक्कर की समुचित मात्रा नियंत्रण द्वारा ही पैर के पंजों को डायबीटीज की जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
अपने फैमिली फिजिशियन अथवा मधुमेह विषय में निपुण चिकित्सक के संपर्क में सदैव बने रहे ताकि आपके पैरों में दर्द, त्वचा के रंग में परिवर्तन या पैरों में जलन या सुई जैसी चुभन या झुनझुनी जैसे लक्षणों को पहचान कर अच्छे से समुचित रोगों का उपचार ले सके।
क्या नहीं करना चाहिए?
घर पर भी नंगे पैर न चले.
अनुचित फिटिंग के जूते न पहनें.
पैर के अंगूठे और दूसरी ऊँगली के बीच या स्लिपर्स कतई न पहनें.
पानी से गीले हुए जूते या सैंडल न पहने जो फंगस का संक्रमण कर सकते हैं.
पैरों के नाखून चाकू या कैंची से नहीं काटे जाने चाहिए बल्कि उन्हें नेल कटर की रेती से घिस लेना चाहिए या सावधानी से लेंस लगाकर नाखून काट लेना चाहिए.
नाखून काटते समय असावधानी रहे तो त्वचा में भी घाव बन सकते हैं.
पंजों में चमड़ी होने वाले जमाओं से जो ठेठ बन जाती है उन्हें स्वयं निकालने का प्रयास करने से बचना चाहिए इसके लिए सक्षम चिकित्सक अथवा मधुमेह पद विशेषज्ञ से संपर्क कर उचित उपचार अनुसार कॉर्न या ठेठ से मुक्ति पाई जा सकती है.
घाव मेँ स्वयं कोई चिपकने वाला टेप, कॉर्न रिमूवर अथवा प्लास्टर न लगाएं.
पांव की उंगलियों के बीच घाव होने की दशा में चिकित्सक की सलाह के बिना क्रीम या औषधीय मलहम न लगाएं.
पैरों को पानी से धोकर सुखाकर कोई औषधीय पाउडर लगाया जा सकता है.
धूम्रपान न करने की सलाह का पालन करें.
धूम्रपान से पैरों को रक्त प्रदाय करने वाली धमनियों की गोलाई कम हो जाती है जिससे रक्त की मात्रा का प्रवाह घट जाता है और कम रक्त प्रवाह से पैरों में बर्जर डिजीज नामक रोग पैरों की स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध होता है.
मधुमेह के रोगियों को अपने पैरों में स्नायु तथा रक्त प्रवाह को स्वस्थ अवस्था में बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, पैदल चलना करना चाहिए.
पैरों की त्वचा की संवेदनशीलता बनी रहे यह आवश्यक है.
पैरों के नाखूनों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि वे बढ़ते हुए आपके नाखून के आसपास की त्वचा में अधिक दबाव तो नहीं डाल रहे हैं जो घाव बनने में सहायक हो सकता है.
ऐसा कहा जाता है कि मधुमेह के रोगी अपने पैरों की जांच और उचित रखरखाव करे तो आप कई कष्टों से बच सकते हैं जैसे –
प्रतिदिन अपने पैरों की जांच करें.
प्रतिदिन पैरों को गर्म पानी से धोएं व नमीदायक लोशन लगाएं.
पैरों को ज्यादा गर्मी अथवा ठंड से बचाएं.
सदैव अच्छी फिटिंग वाले जूते जुराबें सैंडिल पहने.
पैरों के नाखूनों को सही तरीके से काटना सुनिश्चित करें.

Very informative
LikeLike