Matrix/Mayalok

Matrix 1999
Movie Review

परिभाषाएं तो वही रहती हैं परंतु समझने का दृष्टिकोण समय के साथ बदल जाता है.
भगवद् गीता का कोई भी एक श्लोक दो भिन्न समय में पढ़ने पर भिन्न निहितार्थ प्रस्तुत करता है और कुंडलिनी जागरण से एक शरीर का दो स्थानों पर उपस्थित होना जैसे ए ऑटोबायोग्राफी ऑफ योगी के दृष्टांतों को पुनर्जीवित होते देखना चाहते हैं तो 1999 में बनी हॉलीवुड की साइंस फिक्शन मैट्रिक्स को पुनः देखने का योग उत्तम होगा.

यह सुखद संयोग कल मेरे साथ हुआ जब मैट्रिक्स को पुनः देखा तो एक नई परिभाषा गढ़कर सामने प्रस्तुत हुआ जिसमें ऊर्जा के स्थानांतरण के माध्यम से मशीन और मानव जीवन की तुलनात्मक प्रस्तुति न केवल एक बार पुनः विस्मित करने के लिए प्रस्तुत होती है बल्कि एक नई परिभाषा को प्रस्तुत भी करती है. 24 साल पहले बनी यह हॉलीवुड की साइंस फिक्शन क्लासिक आपको एक स्थान पर भविष्य दृष्टा के साथ-साथ मानसिक शक्तियों के माध्यम से ऊर्जा के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत करती है .

वैसे तो साइंस फिक्शन भरोसा कर सकने वाली प्रस्तुतियां नहीं होती हैं परंतु जब बच्चों के लिए बने फ़िक्शन हैरी पॉटर का आनंद लिया जा सकता है तो एडल्ट साइंस फिक्शन, मैट्रिक्स अपने आप में एक नए आयाम को आपके सामने प्रस्तुत करती है जो जीवन के प्रति और इस माया लोक यानी मैट्रिक्स के प्रति आपके दृष्टिकोण को एक नई दृष्टि भी प्रदान करती है

अद्भुत अनुभव रहा माया लोक के इस सेल्यूलॉइड प्रस्तुति का

पुनः देखने योग्य

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