Matrix/Mayalok

Matrix 1999Movie Review परिभाषाएं तो वही रहती हैं परंतु समझने का दृष्टिकोण समय के साथ बदल जाता है.भगवद् गीता का कोई भी एक श्लोक दो भिन्न समय में पढ़ने पर भिन्न निहितार्थ प्रस्तुत करता है और कुंडलिनी जागरण से एक शरीर का दो स्थानों पर उपस्थित होना जैसे ए ऑटोबायोग्राफी ऑफ योगी के दृष्टांतों को... Continue Reading →

Blog at WordPress.com.

Up ↑