आदित्य - आख्यान आदित्य अवलोकनीय,अनिवार्य अर्वाचीन. आसन्न आसंदी पर,अनिल से अवधूत. अरुण से आविर्भाव,अभय अलौकिक. अक्षय आप अविकारी,आभा से आलोकित. आकांक्षा अमृत की,अर्जुन के ओंकार. आलस्य से अछूतेअनथक रहे अपार. आसमान के अखरोट,आलेख अनंता. अधार्मिक और अलंकृतआमरे के आनन्दा. अलख के अद्वैतवादी,अष्टावक्र के अभंग. आत्मा के अनुरागी,आवक्र तुम अरंग अग्नि आसीन,आभा अंतरिक्ष. आसक्ति ही आकर्षण,और... Continue Reading →