सबसे छोटा कंप्यूटर,तुम जानते हो, ना होपास तुम्हारे अनगिनत,भूमि में अकिंचन पड़े हो यह बीज है जीव भी,यहां तहां बिखरे होज्यों ही मिले पानी मृदा,संपर्क में जीवन्त हो. न जाने कैसी रचना,बीज अद्भुत नग्नचोला ओढ़े सगुण भरे, प्रयास में रचाए लगन. थोड़ा जल थोड़ी मृदाऔर अंतस ऊर्जा,पौध बनने को हामीआतुर जैसे घन गर्जा. कहने को... Continue Reading →