सच्चा टूट जाता है

यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है
कुछ झूठ इकट्ठे हो तो बेशक़ सच्चा टूट जाता है

भले करो निरंतर मरम्मतें खुद की
फिर भी एक न एक नुक्स निकल आता है.

नेमतें भले मिली हों कितनी भी
ईश्वर का धन्यवाद मानना भूल जाता है.

आप सबको ख़ुश नहीं कर सकते
पर ख़ुद को भी ख़ुश रखना भूल जाता है

धुरंधर भले कितने ही बने फिरते हो
एक शाम जीवन-रथ रुक ही जाता है

फ़क़ीर की लकीर भले हो टेढ़ी मेढ़ी
मस्त रहे मगन तो प्रभु मिल ही जाता है

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