Eternal To & Fro

आनी-जानी यात्रा

Enjoy this eternal poem. You can read my Spiritual, Travelogue, Poetry & Prose on blog page akbhadoria.com

कभी न कभी
सदा के लिए
थमेगी गति
हृदय के लिए

अवसान तिथि
नियत सबकी
मानो न मानो
नियति मुक्ति की

अंतिम पल में
घूमेगा जीवन
चलचित्र जैसा
धूसर धूमिल

क्या पाप किए
और पुण्य कमाये
अंतिम क्षण भर में
मन में उभर आए

क्षमा भाव कहीं
तो कहीं त्रुटि हुई
निषेध का रस ले
यात्रा पूर्ण हुई

करा अफ़सोस यहीं
खीज कि ये करता
माया काया का लोभ
यहीं कर्ता यहीं भरता

निर्णयों का झंझावात
सही तो कभी अनर्थ
उठते डेरे पर दुखी मन
कि यह जन्म भी व्यर्थ

दौड़ ऐसी मायालोक की
जैसे पट्टा, सदा के लिए
स्वामी बन बैठे भ्रम में
फल को भूले, कर्म जो किए

Note:

पट्टा- ज़मीन का निशुल्क टुकड़ा

अनिल कुंमार भदौरिया पेशे से चिकित्सक है और मध्य प्रदेश शासन में सेवारत हैं.

स्वास्थ्य शिक्षा के संबंध में चिकित्सक भदौरिया की विशेष रुचि है और जीवनशैली रोगों के प्रभावी उपचार के साथ फर्स्ट एड, यौन शिक्षा व CPR के प्रशिक्षण सत्रों में भी सम्मिलित रहते हैं.

सेक्स एजूकेशन नामक पुस्तिका प्रकाशित हो चुकी है. कवि हृदय डॉ. भदौरिया अपने यात्रा वृत्तान्त और कहानियों के संग्रह की तीन अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं. हेल्दी-बुक नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है.

  1. Sex Education by Peacock Books
  2. दृष्टिदृश्य दृष्टा देवांश – पद्य संग्रह

3.अथ कथा यात्रायाम – गद्य कथा संग्रह

  1. सेक्स शिक्षा – हिंदी में यौन शिक्षा
  2. ज़मीन पर मेरे कदम – यात्रा वृतांत

Books at Amazon link.
https://www.amazon.in/s?k=anil+kumar+bhadoria&ref=sr_gnr_aps

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑