Ji & Ok

दो शब्दों की बानगी देखिए, “जी” और “ओके”

“जी” नामक शब्द ना केवल आदरसूचक सहमति का प्रतीक है बल्कि एक सत्कार के साथ अपने से बड़े, अपने बराबर और अपने से छोटे के कथन, वचन, निर्देश, आदेश के महत्वपूर्ण होने का सम्मान जनक संबोधन है जो अपने आप में सहमति-अनुमति को समर्पित है. जी हाँ!

अकेले बोला जाए या उपसर्ग और प्रत्यय रूप में “जी” शब्द का सौंदर्य सराहनीय है जो हिंदी में आप जैसे आदरसूचक शब्द के समकक्ष ही ठहरता है. उदाहरण देखिए, जी आदरणीय, जी महोदय, जी सर, जी मैडम, जी टीचर, जी भाईजी, जी गुरुजी जैसे संबोधन हृदय को छू जाते हैं. एक आत्मानुरागी भाव उत्पत्ति का वाहक है, जी…

हैं न मनमोहक, “जी” का उच्चारण!

वही हाल प्रचलन में अंग्रेज़ी का ओके शब्द हिंदी में कुछ इस प्रकार घुल मिल गया है कि वह “जी” जैसे शब्द को कड़ी टक्कर दे रहा है. “ओके” नामक यह शब्द भी सहमति का प्रतीक है जो अपने से बड़े अपने बराबर और अपने से छोटे के उद्घोष, आदेश , निर्देश के सम्बंध में प्रतीकात्मक सम्बोधन है परंतु इस “ओके” में ना सम्मान है असहमति है ना अनुमति है ना समर्पण है और न ही भवदीय, अभवदीय आत्मा अनुरागी गहराई है. जहां “ओके” औपचारिक भाव का संवाहक है वहीं “जी” आत्मीय संबोधन है. और तो और, बुलाये जाने पर भी, हां जी, कहने मात्र भर से सामने वाले की भंगिमा धनात्मक हो जाती है.

कुछ इसी प्रकार का आनंद “आप” और “तुम” में भी है जहां आप शब्द सम्मान सूचक संबोधन है तो वहीं तुम का संबोधन, सम्मान से थोड़ा परे हो प्रेम के सम्पुट का अधिधात्री हो रोचकता भर देता है.

अनिल कुंमार भदौरिया पेशे से चिकित्सक है और मध्य प्रदेश शासन में सेवारत हैं.

स्वास्थ्य शिक्षा के संबंध में चिकित्सक भदौरिया की विशेष रुचि है और जीवनशैली रोगों के प्रभावी उपचार के साथ फर्स्ट एड, यौन शिक्षा व CPR के प्रशिक्षण सत्रों में भी सम्मिलित रहते हैं.

सेक्स एजूकेशन नामक पुस्तिका प्रकाशित हो चुकी है. कवि हृदय डॉ. भदौरिया अपने यात्रा वृत्तान्त और कहानियों के संग्रह की तीन अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं. हेल्दी-बुक नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है.

  1. Sex Education by Peacock Books
  2. दृष्टिदृश्य दृष्टा देवांश – पद्य संग्रह

3.अथ कथा यात्रायाम – गद्य कथा संग्रह

  1. सेक्स शिक्षा – हिंदी में यौन शिक्षा
  2. ज़मीन पर मेरे कदम – यात्रा वृतांत

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