“आवारा कुत्तों से कैसे हो बचाव”
हम और आप, भारत में आवारा कुत्तों से कुछ इस तरह पीड़ित हैं कि हर व्यक्ति के पास कुत्तों के संबंध में एक दर्दनाक कहानी है. सड़क पर पैदल चलते समय विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं पर कुत्तों के हमले प्राणघातक भी सिद्ध हुए हैं. इस विषय को विवादित ना बनाते हुए यह समझने का प्रयास करेंगे कि कुत्तो से किस प्रकार बचा जा सकता है और कुत्तों के हमले होने पर क्या किया जाना चाहिए.
कुत्तों के द्वारा पाँव में हाथों में या गर्दन के आस पास सिर में काटे जाने पर उपचार की विधियाँ किस तरह से अपनायी जाना चाहिए यह समझने का विषय है.
भारतीय उप महाद्वीप में ही मानव सहयोगी जीवों जैसे कुत्ता, बिल्ली, गाय, भैंस, बकरी, मछली, कछुआ, गिलहरी और पक्षियों के पालने के स्थापित प्रचलन है. इन जीवों के अतिरिक्त दुधारू पशु ना केवल सुरक्षित हैं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मज़बूत स्तंभ भी है. पालतु कैनाइन जीव जैसी कुत्ता -?बिल्ली के मात्र नाखूनों से लगने वाली खरोंच या दाँतों से काटे जाने पर ऐसी विपरीत की स्थिति निर्मित होती है जो रेबीज़ जैसे वायरस से होने वाले रोगों का कारण बनती है जो प्राणघातक हो सकता है.
आख़िर ये जानवर काटते क्यों हैं?
पुराना मानस है कि कोई भी जीव – जन्तु तब तक मानव पर हमला नहीं करते हैं जब तक कि उन्हें उत्तेजित न किया जाए चाहे वे आराम की स्थिति में हों, भोजन कर रहे हो या वो अपनी आत्मरक्षा में हो.
आम तौर पर कुत्ते बिल्ली भोजन की तलाश में सड़कों पर आवारा स्वरूप प्रदर्शित करते हैं और ऐसे में उन्हें यह प्रतीत हो जाए कि यह व्यक्ति उनके भोजन, समागम या आराम या सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता है तब स्वयम रक्षा, भोजन रक्षा या समागम रक्षा में ये जीव हमला करते हैं. रेबीज़ नामक रोग से पीड़ित होने पर ये जीव आदतन हो अपने निकट स्थित या उपस्थित होते जीव, मानव, बच्चों को काटने का अनिवार्य श्रम कर देते हैं.
यह आवश्यक है कि पैदल चलते समय अपने आस पास उपस्थित कुत्तों की भाव – भंगिमा नैसर्गिक रूप और व्यवहार पर ध्यान दें. यदि कुत्तों का व्यवहार असामान्य लगे तो न केवल उन कुत्तों से दूर रहने का प्रयास करें बल्कि संबंधित विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित करने का भी श्रम करें ताकि पागल कुत्ते की पहचान कर उपचार की व्यवस्था हो सके और उसे सामाजिक व्यवस्था से हटाया जा सके.
एक तथ्य यह भी अंकित किया किया गया है कि कुत्ते के पास पहुँचते समय यदि आप कुत्ते के प्रति अपना भय प्रदर्शित करते हैं तो ये जीव आपके ऊपर हमला कर सकते हैं.
इन जानवरों से बचने के उपाय क्या है ?
आम तौर पर जीव स्वयं पैदल चलते हैं वाहन पर सवार मानवों का से बचने का प्रयास करते हैं परंतु कभी कभी वे उत्तेजना में भरे होने के कारण सीधे हमला भी कर देते हैं. ऐसी स्थिति में पैदल चालकों को अपने हाथ में एक छाता, छड़ी या डंडा या पानी की बॉटल जैसे सामान साथ रखना चाहिए जिसका भय इन जीवों को रहेगा और आपको भी हिम्मत रहेगी.
बच्चों के लिए ख़ास तौर से यह आवश्यक है कि जब वे किसी सड़क पर अकेले निकलें तो माता पिता साथ हों. अकेले होने की स्थिति में बच्चे के हाथों में एक डंडा दें, ताकि कुत्तों का झुंड उनके ऊपर हमला करने म ऐसी स्थिति उत्पन्न हो तो कुत्तों के झुंड या कुत्ते की एकल होने पर भी हाथ में पकड़ा हुआ डंडा ज़मीन पर ठोकने मात्र से ये जीव दूर हो जाता है. एक आसान तरीक़ा पत्थर उठाकर हाथ में पकड़े रहने का भी है और फेंकने का प्रदर्शन कुत्ते को डराता है और आपकी किसी हमले से बचत हो जाती है.
इन जानवरों की नाख़ून या दाँतों के निशान लगने पर क्या किया जाना चाहिए ?
किसी भी जीव के नाखूनों के ख़राब हो या दाँत के काटने के निशान का समुचित चिकित्सा की उपचार किया जाना अनिवार्य हैं. सर्व प्रथम उस घाव को साबुन पानी से पूर्णतः कई बार धो लेना चाहिए ताकि घाव में उपस्थित जीव की लार या उसमें उपस्थित जीवाणु, विषाणु, रोगाणु रक्त में न मिलने पाए और साबुन पानी से बह जाए.
यह सुरक्षा का प्रथम क़दम है जिस पर तुरंत कार्रवाई की जाना चाहिए जब तक कि चिकित्सक की सलाह न ले ले जाए. हाथ पाँव में लगे ये निशान पर कोई पट्टी नहीं बांधी जाना चाहिए या टाँके नहीं लगाया जाना चाहिए और घाव को खुला ही रखा जाना चाहिए
कुत्तों के हमले से प्राप्त घाव ख़तरनाक सिद्ध हो सकते हैं उन्हें भी इसी प्रकार साबुन पानी से धोकर घाव खुला रखा जाना चाहिए चिकित्सालय पहुँचने तक होगा खुले घाव को किसी एंटीबायोटिक और एंटी सेप्टिक क्रीम के साथ दबाकर चिकित्सालय पहुँचना तक बाँधने का प्रयास न करें
आवारा जानवरों के काटे जाने पर क्यों चिकित्सालय जाना आवश्यक है ?
जंगली जीवों के काटने से ज़ूनोटिक बीमारियों की एक लंबी श्रृंखला के होने की संभावनाएं होती है जब मेरे भी जैसी बीमारी प्राणघातक हो सकती है इसीलिए इन जीवों के काटने पर प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए
यदि घर में भी पालतू जानवर हो तो क्या टीके लगाए जाना चाहिए?
जी हाँ.
क्या सड़क पर चलते समय किटी से बचना के लिए हाथ में कोई हथियार होना चाहिए?
जी हाँ. छड़ी, डंडा, छाता, बेंत, पानी की धात्विक बॉटल या रूलर जैसे आत्मरक्षा पदार्थ जो आसानी से सड़क पर भ्रमण करते पालतू या आवारा कुत्तों को दिखाई पड़ते हों, का सहारा आपको कुत्तों के हमले से बचा सकता है .
कुत्तों का हमला होने पर क्या करें?
कुत्तों का हमला होने पर स्थिर होने का श्रम करें
बचाव में प्रतिघात न करें
हमलावर या विश्राम करते कुत्ते के सामने भयभीत दिखाई पड़ने का प्रदर्शन न होने दें
भागना नहीं है
दौड़ लगाना नहीं है
ख़ाली हाथों से मुक़ाबला न करे
तुरंत भय प्रदर्शन न करें
भोजन करते समय या सोते समय कुत्तों को न छेड़े.
कुत्तों की आपसी लड़ाई में न छेड़ें.
कुत्ते के संपर्क में आने पर लगी कोई छोटी रगड़, छिलावट या घाव की अवहेलना न करें

अनिल कुंमार भदौरिया पेशे से चिकित्सक है और मध्य प्रदेश शासन में सेवारत हैं.
स्वास्थ्य शिक्षा के संबंध में चिकित्सक भदौरिया की विशेष रुचि है और जीवनशैली रोगों के प्रभावी उपचार के साथ फर्स्ट एड, यौन शिक्षा व CPR के प्रशिक्षण सत्रों में भी सम्मिलित रहते हैं.
सेक्स एजूकेशन नामक पुस्तिका प्रकाशित हो चुकी है. कवि हृदय डॉ. भदौरिया अपने यात्रा वृत्तान्त और कहानियों के संग्रह की तीन अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं. हेल्दी-बुक नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है.
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