जब मिले हम एक रात फेरो पर
लगा फ़रवरी है कि गड़बड़ी है,
संग हँसने को मौक़ा है असल
पर विवाह का मामला बड़ा गंभीर है.
ज्योति दुबली सी घर आई,
संग अपने और उजाला लाई
कहते सब जब दो आत्मन मिले
भाग्य भी दोगुना हो जाता है.

हुआ कुछ मेरे साथ भी ऐसा
जब मिले हम तो सबसे पहले
कुछ ऐसी नौकरी का अवसर हुआ
जैसे नहले पे लगे हों दहले

फिर तो गद्दी जैसे चल पड़ी हो,
कुछ हौले हौले कुछ मुसकाये
पापा की परी मनु दी ज्योति ने
आहिस्ता से शिवि जेंटलमैन आये

माँ पिता के निखिल शुभाशीष से,
चौतीस का ये जोड़ होने आया
त्याग, गुस्सा, स्नेह से आलोकित
यह वट वृक्ष तुमने खुद लहलहाया
प्रभु शिव की अनुकंपा से
आगे भी दौड़ अभी बाक़ी है
संतोषी सदा पहिया घुमाते रहो
स्वस्थ तन मन की उड़ान अभी बाक़ी है

अनिल कुंमार भदौरिया पेशे से चिकित्सक है और मध्य प्रदेश शासन में सेवारत हैं.
स्वास्थ्य शिक्षा के संबंध में चिकित्सक भदौरिया की विशेष रुचि है और जीवनशैली रोगों के प्रभावी उपचार के साथ फर्स्ट एड, यौन शिक्षा व CPR के प्रशिक्षण सत्रों में भी सम्मिलित रहते हैं.
सेक्स एजूकेशन नामक पुस्तिका प्रकाशित हो चुकी है. कवि हृदय डॉ. भदौरिया अपने यात्रा वृत्तान्त और कहानियों के संग्रह की तीन अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं. हेल्दी-बुक नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है.
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- दृष्टिदृश्य दृष्टा देवांश – पद्य संग्रह
3.अथ कथा यात्रायाम – गद्य कथा संग्रह
- सेक्स शिक्षा – हिंदी में यौन शिक्षा
- ज़मीन पर मेरे कदम – यात्रा वृतांत
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Happy Anniversary 💐💐🌹🌹
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Thanks
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