Sudden Marathon Death

इंदौर में 1 फ़रवरी को आयोजित मैराथन दौड़ में एक दर्दनाक और दुखद हादसा हुआ, जब एक छब्बीस वर्षीय युवक द्वारा अपनी दस किलोमीटर की दौड़ के अंतिम सौ मीटर में हृदयाघात से मौत को प्राप्त हो गया!

हम इंदौर वासियों के लिए यह विस्मय, दुख और पीड़ा से भरा घटनाक्रम रहा परंतु यह प्रश्न भी प्रत्येक मस्तिष्क में उत्पन्न हुआ कि आख़िर इस युवा शरीर में ऐसे क्या परिवर्तन हुए कि हृदय ने ऑल या नन का नियम पालन करते हुए सीधे हथियार डाल दिये!

कुछ कारण समझ में आते हैं.
पहला कारण तो यह प्रतीत होता है कि प्रदर्शन और सोशल मीडिया की बाध्यताओं के चलते अड़ोसी – पड़ोसी, मित्रों की देखा – देखी बिना अभ्यास के नए नवेले उत्साही, सीधे मैदान में उतर जाते हैं यह सोचते हुए कि उनका शरीर स्वस्थ है और वो अपनी शारीरिक सीमाओं को उल्लंघन करने का प्रयास करते हैं (Pushing the limits). ऐसे में घटना होने की संभावनाएं प्रबल हो जाती है. ऐसे कई घटनाक्रम नए जिम साधकों में भी देखने में आए हैं जब वे ट्रेडमिल पर चढ़ गए और दुर्घटना से साक्षात्कार कर बैठे.

दूसरा कारण यह समझ आता है कि आधुनिकता के इस दौर में ख़ासतौर से जो बच्चे हॉस्टल में रहकर या किराये के कमरे में रहकर विद्यार्थी और सेवार्थी जैसा जीवन व्यतीत करते हैं उनके द्वारा ग्रहण किए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में कहीं ना कहीं कमी हुई है.
हम सब जानते हैं कि मांसपेशियों और मस्तिष्क को भोजन के रूप में ग्लूकोस की आवश्यकता होती है जबकि हृदय की ऊर्जा का स्रोत फ्री फैटी एसिड होते हैं और घर में भोजन ना बनाने की आदत तथा पाँच मिनट में क्लाउड किचन से भोजन डिलीवर होने की सुविधा ने पर्याप्त गुणवत्ता के भोजन की अनुपलब्धता ने हमारे बच्चों के भोजन में फ्री फैटी एसिड जैसे पौष्टिक तत्वों की कमी कर दी है. यह भी एक कारण हो सकता है.

पुरातन घरेलू भोजन शैली से शरीर को आवश्यक रूप से लगने वाले सभी तत्वों की पूर्ति हो जाती थी.
किसी भी तरह के फ़ास्ट फूड या बाज़ारी भोजन के नियमित सेवन से बचने का उपक्रम सीखना होगा और घर के बने भोजन से श्रेष्ठ कुछ नहीं है यह समझना भी होगा!

क्या यह सच्चाई के निकट है?

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