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✔️पैदल चलते में सड़क दुर्घटनाओं से कैसे बचें-
यदि आपसे मैं यह कहूं कि हम भारतीयों को सड़क पर न तो पैदल चलना आता है और न ही वाहन चलाना आता है और इसीलिए देश में सड़क चालन की गलतियों से ही पैदल यात्रियों की प्रतिवर्ष डेढ़ लाख बाइकर्स बिना हेलमेट यात्रा करने से और कार दुर्घटना में लगभग 75,000 लोगों की मौत हो जाती है.
यह सोचनीय विषय हो सकता है कि आखिर क्यों यह आलेख सड़क पर चलने के नियमों के लिए लिखा जा रहा है?
जागरूकता हो ताकि दुर्घटना न हो, स्वास्थ्य रक्षा बनी रहे और देश के के नागरिकों को छोटी मोटी अनजान जानबूझकर नहीं की गई गलतियों के कारण चिकित्सक की सलाह यह अस्पताल में भर्ती होने की नौबत न आए आए.
पैदल चलने के नियम –
भारत में एकल रोड पर सड़क की दायीं और चलने से वाहन सामने से आते दिखाई पड़ते हैं जिससे आप की निगाह द्वारा वाहन की दिशा, गति, मंशा आदमी का अंदाज़ा आपको लग पाता है और यदि किसी दुर्घटना की आशंका आप हो लगे तो सामने से आती हुई दिखती गाड़ी से आप अपना बचाव कर सकते हैं
वहीं एकल या दोहरी सड़क और यदि आप वाहनों के चलने की सही दिशा याने बाईं ओर से चलने का नियम पालन करते हैं वह स्वाभाविक रूप से आपके पीछे से आने वाले दोपहिया वाहन या तीन पहिया रिक्शा/ऑटो या 4 पहिया वाहन या बड़े व्यावसायिक वाहन आपके पीछे से आएंगे तो आपको न तो वाहन गति का अन्दाज लगेगा ना ही आप वाहन के दिशा का अंदाज़ लगा पाएंगे और आपकी स्थिति विकट हो सकती है.
यही नियम कमोबेश दोहरे रोड के लिए भी लागू है जहाँ जाने और आने के वाहनों के सुचारू परिवहन के लिए सड़क के मध्य एक विभाजक उपस्थित रहता है ल. यह न होने पर पैदल पथ न होने पर भी इसी प्रकार ये नियम का पालन किया जाना आपको पैदल चलते में सुरक्षित कर सकता है रख सकता है
यदि वाहनों की उच्च स्तरीय हाईवे और आपको पैदल चलना पड़े तो आम तौर पर इन उच्च स्तरीय मार्गों पर पैदल चालकों के लिए पक्का पथ बना होता है और ऊँचाई पर बने इस पक्के पाथ पर दाएँ या बाएँ चलते रहने से आपकी सुरक्षा सुनिश्चित होती है क्योंकि वाहनों का सड़क पर चलने का स्तर के पद से नीचे होने से आपकी सुरक्षा बेहतर होगा.
बात भले छोटी प्रतीत होती हो परंतु पालन की जा सके शायद!
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