
अंगड़ाई!
जन्म से लेकर मृत्यु तक का जीवन जीने की शैली में विज्ञान का समावेश है और यह विचार का विषय हो सकता है. आठ घंटे की प्रचुर नींद के बाद प्रातः काल में आपके जागते ही शयनस्थल पर भी ऐसा क्या किया जाना चाहिए ताकि शरीर के आराम के शिथिल अवस्था से खड़े होकर ऊर्जावान अवस्था में आने में अधिक समय न लगे.
अंगड़ाई
बिस्तर पर लेटे से उठते समय सुबह सुबह शिथिल अवस्था से सक्रिय अवस्था में आने के पूर्व या बहार वाहन करने के पूर्व अंगड़ाई का स्थापित सिद्धान्त है और वैज्ञानिक तौर से जीव जन्तुओं में भी स्ट्रेचिंग अर्थात अंगड़ाई लिए जाने के दृश्य उपस्थित होते हैं अंगड़ाई लिए जाने से शरीर की मांसपेशियां करारा में रक्तसंचार की वृद्धि होती है जो जोड़क-तंतु लिगामेंट एवं टेंडन में तनाव की अनिवार्य आवश्यक मात्रा स्थापित होती है
अंगड़ाई के लाभ-
अंगड़ाई लेने से हृदय की गति और रक्त परिसंचरण में गति आती है मस्तिष्क में रक्त प्रवाह एवं जागरूकता का एक उच्च स्तर स्थापित होता है शरीर के भार वाहन जोड़ों में रक्त प्रवाह में वृद्धि होती है और वे चलायमान होते हैं .
अंगड़ाई के लिए जाने के तुरंत बाद रक्तचाप, रक्त शर्करा अपने सामान्य स्तर पर स्थापित होने का प्रयास करते हैं तथा चक्कर आना या सिर घूमना जैसे मानसिक एवं मस्तिष्क जनित परिस्थितियों के उत्पन्न होने से भी मुक्ति मिलती है.
अंगड़ाई कैसे, कब और कितनी-
बिस्तर से उठते समय कमर से सीधे बैठ जाने का प्रयास करने से बचना चाहिए. इस बात की सलाह दी जाती है कि पलंग के किनारे से करवट लेकर हाथों का सहारा बिस्तर के सिरहाने से लेते हुए, दोनों घुटनों को जोड़ से मोड़कर और पंजों से जोड़ों को चलाने का प्रयास किया जाए. दोनों हाथों के साथ कमर को स्ट्रेच करने का प्रयास किया जाए तथा सबसे अंत में बजे भुजंगासन जैसी स्थिति में सिर को कमर से उठाया जाए जबकि आप पीठ के बल लेटें हों.
20-60 सेकंड के मध्य अंगड़ाई ले जाना पर्याप्त है जो अल्प समय की स्ट्रेचिंग है जिससे आगे की गतिविधियों के लिए शरीर तैयार हो जाता है.
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