Aggressive Approach(428)

हाल ही में आत्महत्या और हत्या के दो अजीबोगरीब क़िस्से सुनने में आये है. क्रिप्टो – करेंसी के एक्सचेंज आधारित कारोबार में 30 मिलियन यूएस डॉलर के विरुद्ध मार्जिन पर 100 मिलियन डॉलर का दाँव खेलने वाले यूक्रेन के एक युवा को त्वरित घाटा होने से अपनी महँगी कार लैंबोर्गिनी में आत्महत्या करना पड़ी है.

वहीं स्टॉक मार्केट की ट्रेडिंग में सफल 26 वर्षीय युवा की हत्या उसके मित्रों ने सिर्फ़ इसलिए कर दी क्योंकि स्टॉक ट्रेडर युवक की सफलताओं की ख़ुद की पोस्ट की हुई सोशल मीडिया पर सफलता की उजली कहानी मित्रों के गले नहीं उतर पाई और कड़वा घूँट पीकर इस सफल मित्र की हत्या कर दी.

दोनों ही प्रकरणों में लोभ और अहंकार के दंभ के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी स्वयं के अति सफल होने का प्रचार प्रसार प्राण घातक सिद्ध हो गया .

पुराना कथन है कि किसी भी व्यक्ति की सफलता से उसके माता पिता के अतिरिक्त कोई प्रसन्नचित नहीं होता है.

आश्चर्य का विषय यह है कि दूसरे की सफलता से उत्पन्न होने वाली जलन और द्वेष की भावना इतनी भयावह ख़तरनाक हो सकती है यह सोचने योग्य है. वहीं दूसरी जगह यूक्रेन के इस नागरिक की क्रिप्टो बाज़ार में ट्रेडिंग की एग्रेसिव एप्रोच के कारण प्राप्त हुई सफलता से उच्च स्तरीय जीवन शैली का भव्य प्रदर्शन हुआ और लोगों ने अपनी गाढ़ी इस नौजवान के हाथ में सौंप दी. मुद्रा राशि कब मुद्रा राक्षस बन जाए कहना संभव नहीं. सफलता के समुद्री लहर परसवार हो ने भर से उच्च स्तरीय आत्म विश्वास समुद्र में डूबने का कारण बनता है. दुखद संदेश है यह.
दूसरों का उधार पर उपलब्ध आसान धन और उसके विरुद्ध तीन गुना अधिक का दाँव खेलकर हाथ की पूर्ण मुद्रा गंवा बैठे हैं और वह मुद्रा 30 मिलियन डॉलर की मुद्रा उधार लेकर बाज़ार में लगायी गई थी.
तो इस तरह के दुखदायी घटनाक्रम कभी कभी होते हैं परंतु दूसरों के साथ गुज़री दुखदाई कथा से भी शिक्षा प्राप्त की जाना चाहिए

घटनाक्रम दुखद है परंतु विचारणीय भी है

2 thoughts on “Aggressive Approach(428)

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  1. बहुत ही गहरा और विचारणीय विश्लेषण है। आपने आधुनिक समाज की दो सबसे बड़ी कमजोरियों—सोशल मीडिया पर दिखावे की प्रवृत्ति और उससे पैदा होने वाली घातक ईर्ष्या—को सटीक तरीके से उजागर किया है। ये घटनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब सफलता के साथ विवेक और विनम्रता नहीं होती, तो वह स्वयं के और दूसरों के लिए विनाश का कारण बन जाती है। इससे यही सीख मिलती है कि अपनी उपलब्धियों को शांति और समझदारी से सहेजना कितना आवश्यक है।

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