Colour Supremacy. (376)

मैं श्रेष्ठ हूँ
ऊर्जा से पूर्ण नीला रंग बोला

मैं श्रेष्ठ हूँ नहीं मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूँ.
वार्तालाप में नीले रंग से हरे रंग ने अपनी धौंस जमाई.

बाक़ी सात रंग, सानंद अपने रंग में शांत भाव से मिल बैठे दो रंगीले-रतन की नोंक-झोंक का मजा ले रहे थे.

नीले रंग ने कहा मेरे रंग से आसमान और समस्त जलराशि आलोकित है. समुंदर का रंग भी नीला है. नीला रंग सर्वोपरि यह सबसे अधिक पसंद आने वाला रंग है चाहे वह नेवी ब्लू हो या आइवरी ब्लू. मेरे रंग के शेड्स तो असंख्य हैं.

तो हरा रंग बोल पड़ा तभी तो तुम श्रेष्ठ हो है सर्वश्रेष्ठ तो है हरा रंग.
हरे ने बोलना जारी रखा.
मैं हरित क्रांति हूँ और प्रकृति ने मुझे ही जीवन के रंग रूप के लिए चुना है. मैं पेड़ हूँ मैं पत्तियों में हूँ, क्लोरोप्लास्ट में हूँ. मेरा रंग जीवन का प्रतीक है जो बिना हिंसा और बिना रक्त बहाए सभी जीवों की उदरपूर्ति में सहायक है. क्या पशु या पक्षी क्या मानव या जीव, मेरे जीवंत रंग से ही फूलते फूलते हैं. इसीलिए मैं घर में चौबारे में खेत में जंगल में पहाड़ में समंदर में सब जगह है हरा रंग.

हरा सर्वश्रेष्ठ है, सुनते सुनते ही रंगों की जमात में ऊर्जा का परिसंचरण हुआ और काला रंग अपने सारे धूसर आलोक को ले उठ खड़ा हुआ, न नीला न हरा, मैं मिट्टी का रंग हूँ और मेरे बिना न नीला उत्पन्न हो सके और न ही हरा. मैं सर्वव्यापी हूँ. पवित्र पृथ्वी तो मेरी धरोहर है ही अंतरिक्ष में भी मेरी उपस्थिति यत्र तत्र सर्वत्र है जो सीमित नेत्र ज्योति के परे हैं और तो और सब रंग मुझमें समाहित हैं. पंचतत्व की अवधारणा का सिद्धांत की जड़ में मैं हूँ. मैं ब्लैक होल हूँ, मैं ग्रह हूँ, उल्कापिंड हूँ और तो और चंद्रमा और सूरज भी हूँ. श्रेष्ठ, सर्वश्रेष्ठ जो हो ना हो श्याम सर्वोपरि और सर्वव्याप्त हूं. पर तुम मानोगे नहीं क्योंकि सत्य स्याह है.

कहीं श्वेत खड़े खड़े मंद मंद मुस्का रहे थे कि बृहत प्रकार के सब रंग मुझमें ही समाहित हैं और भजन निरर्थक रंगों का.

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