Free Giving brings Animosity(Blog 368)

प्रथम बार जब आप किसी को कुछ निःशुल्क देते हैं तो वह है
प्रशंसा
(एप्रिसिएशन)

दूसरी बार जब आप किसी को कुछ निःशुल्क देते हैं तो आपने पैदा किया है –
प्रत्याशा या पुर्वानुमान
(एंटीसिपेशन)

तीसरी बार जब आप किसी को कुछ निःशुल्क देते हैं तो अब जातक को पैदा हो जाएगी –
आशा और उम्मीद
(एक्सपेक्टेशन)

चौथी बार जब आप किसी को कुछ निःशुल्क देते हैं तो अब आज
एक अधिकार का भाव पैदा हो चुका है
(एंटाइटलमेण्ट)

पाँचवी बार जब आप किसी को कुछ निःशुल्क देते हैं तो आपने
आसन्न निर्भरता
( डिपेंडेंसी ) स्थापित कर दी है

छठी बार जब आप किसी को कुछ निःशुल्क * नहीं* देते हैं तो आपने एक दुश्मन पैदा कर लिया है
(एनिमोसिटी)

कम लिखा है बहुत समझना

परंतु

विचार अवश्य कीजिएगा

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