पर्व ….
बधाई हो, विवाह की वर्षगाठ की बधाई. खूब खुश रहो. फूलो फलो.
……क्या भाई सब, आप भी इतने जोश से बधाई दे रहे हैं जैसे आज कोई पर्व हो.
दो साढू जो २ सगी बहनों से ब्याहे होते हैं, आपस में फोन पर चर्चारत हैं.
…….अरे भाई, विवाह की वर्षगांठ की बधाई तो जन्मदिवस की भांति ही देना होती है. संतोष भले हो न हो, खुश तो दिखना हो पड़ता है.
खिन्न भाव से हंस दिए साढू भाई.
बोला, मैं फिर, कि
देखो भाई, भले रोज शहीद हो रहे हो पर्व तो मनाना ही पड़ेगा. अन्यथा शहीद होने का कष्ट बढेगा. और शहादत भी पहचानी नहीं जाएगी. अतः शहीद होते चलो, पर्व मनाते चलो, और दोनों साढू खिलखिला के हंस दिए.

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