Let’s Do, Daily!

प्रतिदिन एक बार😍

मानव शरीर विविधताओं से न केवल भरपूर है बल्कि हर व्यक्ति के स्वास्थ्य प्रतिमानों के प्रति मापदंड भी भिन्न भिन्न है और इसी कारण से स्त्री पुरुष बच्चों वृद्ध युवा अधेड़ सदैव स्वस्थ रहने के एक ऐसे मंत्र को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहते हैं जिससे शरीर न केवल स्वस्थ रहे बल्कि कोई रोग होने पर स्वास्थ्य लाभ भी तेज गति से हो जाए…

इसी तारतम्य में “प्रतिदिन, एक बार” का नियम यदि हम पालन करने लगे तो संभावना इस बात की है कि पूरे शरीर की सर्विसिंग प्रतिदिन होती रहेगी जिससे अनिवार्य मजबूती और लचीलापन शरीर में बना रहेगा.

प्रतिदिन एक बार-

100 मीटर की दौड़ या जितना जैसे भी संभव हो सके
( आपके फेफड़ों में तेज गति से वायु का पारगमन हो तो रक्त संचार बढ़ने से विषैले तत्वों का निस्तारण दैनिक रूप से हो जाये)

40 मिनट्स का पैदल चलना
( इस प्रक्रिया को प्रतिदिन की अनिवार्य गतिविधि के रूप में प्रयोग करने से शरीर की फैक्ट्री के समस्त मांसपेशी और जोड़ की पूर्ण रेंज में व्यायाम हो जाने से स्वास्थ्य उत्तम बना रहेगा)

1 मिनट का जोरदार अट्टहास
( फेफड़ों के व्यायाम के लिए दौड़, तेज चालन के साथ मित्रों के साथ हंसी ठहाका लगाने भर से फेफड़ों तथा वायुमार्ग में उपस्थित रक्त वाहिनियों की सर्विसिंग के साथ मस्तिष्क का रक्त संचार सुचारू हो जाता है)

1मिनट का ध्यान
ध्यान का तत्पर्य सभी इंद्रियों को समेत कर अंतर्गमन की यात्रा करना जहां आप स्वयं से बात कर अपनी स्वयं की संगोष्ठी में विचारहीनता को स्थापित करने का प्रयास करें. आरंभ में यह जटिल हो सकता है परंतु निरंतर प्रयास से ध्यान लगाना संभव है)

5 मिनट का नेत्र खोलकर या बन्द कर मौन – स्वयं की यात्रा सबसे जटिल है अतः कुछ क्षण को अंतर्मन के साथ की बैठक आपको एक अनुपम अनुभव दे सकती है

1 मिनट का हांफना (दौड़ कर या भले बैठ कर लें)
हृदय और फेफड़े एक इकाई की भाँति मंथर गति से निरंतर सोते जागते कार्य करते चलते हैं . दिन में एक बार हांकने से हृदय और फेफड़ों के बीच एक तेज गति का सामंजस्य होता है जिससे विष तत्व परिसंचरण से बाहर हो जाते हैं.

1मिनट की पैरों की स्ट्रेचिंग

1मिनट को बांहों की स्ट्रेचिंग

1मिनट की रीढ़ की हड्डी की स्ट्रेचिंग

एक बार भर पेट 2-2.5 लीटर पानी का सेवन

एक बार मित्रों का साथ भेंट का मौक़ा पैदा कर अनौपचारिक चर्चा कर लें तो मानसिक और भावनात्मक विश्राम प्राप्त हो सकेगा

एक बार आधा भोजन (जितनी भूख है उसका आधा) – उपवास के आदर पर भरपेट भोजन न करने से शरीर में फुर्ती बनी रहती है

एक बार दही या छाछ का सेवन जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है

एक बैठक में एक प्रकार का रंगीन फल- विभिन्न रंग के फलों का अपना महत्व है जिसे नियमित सेवन से कई विटामिन और धरती- तत्वों की प्राप्ति होती है और प्रथक से विटामिन औषधि का सेवन नहीं करना पड़ता है.

एक बार हरी पत्तेदार सब्जी का भोजन-

एक बार मोटा अनाज की रोटी-

एक बार परिवार के साथ बैठकर भोजन/गपशप- कारण स्पष्ट हैं

एक बार किसी पुस्तक के 10 पेज का पाठन- पुस्तक पठन चेतना को जागृत करने में सहायक है

5 मिनट की दोपहर में झपकी- शरीर कंप्यूटर की भांति कार्य करता है तो पाँच मिनट की झपकी आपको पुनः शक्ति प्रदाय कर सकती है (Power Nap)

नियमित और अनुशासित प्रयोग से यह स्वयं- सुधार ( सेल्फ-हीलिंग) को सदा तैयार मानव शरीर कभी बीमार नहीं पड़ेगा
और जो बीमार पड़े तो कम समय में आपका स्वास्थ्य पुनः स्थापित हो सकेगा

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