Aged 60

साठ का पाठ

अब आज साठ के हैं
तो आकांक्षा शेष नहीं
तत्व एकत्र करते हैं
तो अभिलाषा शेष नहीं

अब आज क्रशकाय हैं
तो भागम-भाग शेष नहीं
समेटा करने की सोचो
तो शक्ति प्रबल शेष नहीं

अब आज अस्थि भंगुर है
और मोहब्बत शेष नहीं
यादें कुरेदते रहो यूं
कि उर्जा समर्थ शेष नहीं

अब आज ऐसे अकेले हैं
जहां जीवंत रिश्ते शेष नहीं
अफसोस,क्षमा,दोष यहां
आरोपों की झड़ी शेष नहीं

अब आज ऐसी तैयारी है
बहुत समय शेष नहीं
घर वापसी की जो सोचो
तो जीने की चाह शेष नहीं

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