नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः । न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥
अध्याय २ श्लोक २३
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं:


इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते हैं और अग्नि इसे जला नहीं सकती है | जल इसे गीला नहीं कर सकता है और वायु इसे सुखा नहीं सकती है ।।
आत्मा क्या है?
कल्पना है ?
या
कपोल कल्पित
या
मात्र अनुमान
या
अनंत परिभाषा ….
गीता में ऊपर लिखे के श्लोक के अनुपालन में जीवन का एकमात्र आधार ऊर्जा है ऊर्जा है ऊर्जा है ऊर्जा है ऊर्जा है.
ऊर्जा वह घटक तत्व है जो ना उत्पन्न की जा सकती है ना नष्ट की जा सकती है तथापि एक स्थान से दूसरे स्थान पर अपना रूप परिवर्तित कर बहती रहती है.
यह भौतिकशास्त्र का अनधिकार से स्थापित नियम है.
ऊर्जा जो विभिन्न चरणों में एक शरीर को पा जाए तो वह न केवल जीवन का उद्देश्य बन जाती है और शरीर का त्याग हो जाए तो नए जीवन की उत्पत्ति के लिए पुनः किसी को उपलब्ध हो जाती है और इसी ऊर्जा को सनातनी आत्मा के रूप में जानते हैं.
ऊर्जा का प्रादुर्भाव सकल जीवन में बाल्य काल युवावस्था और वृद्धाश्रम तक भले कायम रह जाए इस ऊर्जा का विचरण सन्यास आश्रम में त्याग अवस्था में आ जाने पर किस दिशा में किस लोक में गमन कर जाता है यह श्मशान में ही समझ में आता है
और इसीलिए इस वैराग्य को शमशान वैराग्य का नाम दिया गया है क्योंकि ऊर्जा अपनी अंतिम इस जीवनकाल की अपनी अंतिम परिणीति को घटित होते देखते हैं ऊर्जा का वह सत्य जो न केवल अपरिवर्तनीय है अनष्टकारी है.
भौतिकी में, ऊर्जा वस्तुओं का एक गुण है, जो अन्य वस्तुओं को स्थानांतरित किया जा सकता है या विभिन्न रूपों में रूपान्तरित किया जा सकता हैं। पृथ्वी पर लगभग समस्त जीवन के लिए सूर्य ऊर्जा का स्रोत है। मुख्यतः वह प्रकाशीय ऊर्जा, ऊष्मीय ऊर्जा और अवरक्त ऊर्जा छोड़ता है।
प्रकृति में ऊर्जा कई अलग अलग रूपों में मौजूद है। इन के उदाहरण हैं: प्रकाश ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा, गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, ध्वनि ऊर्जा, रसायनिक ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा। प्रत्येक ऊर्जा को एक अन्य रूप में परिवर्तित या बदला जा सकता है। ऊर्जा के कई विशिष्ट प्रकारों में प्रमुख रूप गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा है।
प्रश्न है कि आत्मा का विचार ऊर्जा ही है अथवा आधुनिक विज्ञान के सन्दर्भ में कोई आदर्शनीय माइक्रोचिप?
चिकित्सा विज्ञान आज तक आत्मा का स्थापना बिंदु नहीं खोज पाया है कि
मानव शरीर में कहाँ स्थापित है आत्मा ?
जबकि ऊर्जा तो बहती चल रही है रक्त वाहिनी में मांस पेशी में हृदय में मस्तिष्क में रक्त में !
Leave a comment