पग धरे गंभीर
छोटा बच्चा चले डगर डगर
हाथ फैले संतुलन इधर-उधर
धीरे-धीरे पग धरे गंभीर
छोटे-छोटे दृढ़ जमे धीर
मन भी बच्चा है,
रखे पग पग हौले होले
डरे संभले फिर भी
आगे को बढ़ ले
कुछ सोचे मलिन
और कुछ सोचे पावन
विवेक को जो धरे
पवित्र जैसे सावन
कभी गिरे बच्चा
डगमगा कर
फिर खड़ा हो
हिम्मत फिर जुटाकर
मन भी गिरे
माया को ललचाए
एक बार तो
विवेक उसको समझाएं
यह जोड़ लूं
वह भी समेट लूँ
जैसे अमर हों
मैं भी परम हूं
यात्रा अनजानी
मन से भरमाये
वासना को
हर्षित मन ललचाए
बच्चा है मन है
चलता अगर मगर
सही गलत को चुना
तो पा जाएगा वैसी डगर

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