On the Banks…

किनारा

क्यों घूम घूम कर आ जाता हूँ,
कुछ यूं ही सोचता जाता हूँ.
गुम हो जाता हूं कहीं इस तरह,
दूर अपने से, जहां किनारा नहीं…

बहती धारा में यूं चला जाता हूं ,
न जाने कैसे किनारा पकड़ जाता हूं .
यह किनारे होते बड़े अजीब हैं,
बेबस, मैं किनारा कर जाता हूं…

जब किनारे पर खड़ा होता हूं,
न जाने क्यों मैं थरथरा आता हूं.
यह किनारा कहीं मुझे डूबा ना दे,
एक अदद सहारे की तलाश करता हूं.

किनारे ऐसे भी, जो किनारे लगा देते,
धारा से यूं परे परे हटा देते हैं.
दरवेश दिल मेरा यूं बैठा जाता है,
कहीं जाना नहीं और दूर चला जाता हूं

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