Nashik : Spiritual Place

आध्यात्मिक ऊर्जा है नासिक में

38 दर्शनीय स्थल एक नगर के आस पास. पंचवटी सीता गुफा, दुधसागर जल प्राप्त, सप्तश्रंगी, ज्योतिर्लिंग, नाशिक गुफा बौध हीनयान को समर्पित, अजनेरी हिल्स – हनुमान जन्म स्थल, कपिलेस्वर मंदिर,जैन टेम्पल, दुगार्वादी जल प्रपात, कालाराम टेम्पल, बालाजी देवस्थान, पत्थर मुसें, कॉइन म्यूजियम, वाइन यार्ड, अंगूर के खेत और एक जीवंत नगर याने नाशिक.

एक महानगरपालिका है नाशिक, जो महाराष्ट्र में स्थित है परंतु ऊर्जा से भरपूर यह शहर, हर प्रकार की ऊर्जा जैसे पर्यटन, व्यव्साय के नये आयाम, आध्यात्म या विश्राम के नए स्थानों की अगर आपको तलाश हो तो गोदावरी नदी के तीरे पर स्थित है नाशिक. निजी रिसॉर्ट या यूं ही स्थितप्रज्ञ या ध्यान मग्न हो, समय और नदी के प्रवाह के साथ एकसार करना हो तो नासिक नगर पुरातन मूल्य को पुनर्जीवित कर देता है. आध्यात्मिक, प्राकृतिक, पौराणिक के अतिरिक्त व्यवसायिक रूप से यह नाशिक नगर आदि काल से संपन्न रहा है. जमीन की प्रचुर व प्रखर उर्वर क्षमता के चलते अंगूर और अंगूर की बेटी का उद्योग कालांतर में बहुत फुला फला और किसी भी घुमंतु परिवार या समूह के लिए नाशिक यात्रा, जीवन में यादों की धरोहर से कतई कम नहीं है.

राम सीता गुफा जो नासिक के समीप पंचवटी में लगभग ५१०० वर्ष पूर्व की है, संभवत ऐसी संपदा है जो आपको उस पौराणिक काल में पल दो पल के लिए समयातीत प्रस्तुति कर देती है. आप विचार शून्य हो भाव शून्य हो जाते हैं कि किस प्रकार आपके महामना पूर्वज क्षेत्र विशेष की पवित्रता को पहचान यहां अपना अमूल्य समय जिया और जो आज भी हमारी यादों का ऐसा स्थल है जो धर्म, जाति, गठबंधन से नितांत परे होकर हमारी अतुलनीय संपदा है. यह स्थल प्रकृति के मूल स्वरूप में ही आज भी स्थित है और मथुरा वृंदावन के यमुना तीरे की कृष्ण लीला जैसा रामलीला का परिदृश्य प्रस्तुत करता है. पंचवटी नाशिक हमारी धरोहर है जो नासिक के दक्षिण में ३ किलोमीटर दूर स्थित है तथा टैक्सी ऑटो सड़क मार्ग द्वारा आसानी से वहां पहुंचा जा सकता है.

आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है नाशिक जहाँ शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक श्री त्रयंबकेश्वर महादेव का पावन तीर्थ है गोदावरी नदी के उद्गम पर स्थित है. यह ज्योतिर्लिंग एक अर्वाचीन मंदिर में स्थित है जो मंदिर के भवन की पौराणिक एवं भवन कला का अद्भुत द्रश्य प्रस्तुत करता है जो हमारे कला पारखी पूर्वजों और कलाकारों की अद्वितीय पत्थर विन्यास शैली का प्रतीक है. हालांकि मंदिर के ज्योतिर्लिंग गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं है फिर भी दर्शन लाभ हेतु लिंग स्थान के ऊपर एक बड़ा दर्पण भी स्थित है जहां से भी मन भर के ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं. गर्भगृह में तीनों महादेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश के सांकेतिक द्रश्य दृष्टिगोचर होते हैं और दर्शन होते हैं एक भावातिरेक भाव उत्पन्न हो जाता है जो पिरामिड नुमाइश मंदिर में संचित ऊर्जा के शरीर में प्रवाहित होने का द्योतक भी होता है.

मुख्य मंदिर के गर्भ गृह के सम्मुख ही अभिषेक ध्यान और आराधना हेतु स्थान उपलब्ध है जहां आप ध्यानमग्न हो कर भी ईश्वर, जो साकार या निराकार रूप जिसे आप मानते हो, ऊर्जा के नए स्वरूप में साक्षात्कार या एकसार कर सकते हैं. एक अजब सी अनुभूति इस प्रांगण में महसूस होती है जो कि केंद्रित कुंज का परिचायक है. नासिक से 28 किलोमीटर दूर है त्रियाम्ब्केस्वर ज्योतिर्लिंग हिंदुओं का बड़ा तीर्थ होने के साथ साथ अतिरिक्त कर्मकांड और पूजा पाठ का एकमात्र सिद्ध स्थल है जहां पूर्वजों की आत्मा शांति आत्मा सिद्धि के लिए नारायण नागबली और कालसर्प दोष की विधिवत 3 दिनों की और 1 दिन की पूजा संपन्न होती है. कर्मकांडी साधकों तथा पंडितों की बड़ी संख्या बढ़े विधि-विधान और निष्ठा पूर्वक पूजा-पाठ कराते हैं और सूतक काल में ही अपने घर में ही यजमान होकर अतिथि साधकों को भोजन व रहने की सारी व्यवस्था कर देते हैं. एक अद्भुत शांति की अनुभूति का साक्षात्कार के ऊपर आपको होता है पूर्वजों की मुक्ति या शांति का कर्म, फलिभूत हो या ना हो एक विशिष्ट आत्मिक शांति से आप भर जाते हैं. इस प्रकार के पूजा कर्मकांड हेतु नासिक के समकक्ष कोई स्थल पूरी पृथ्वी पर उपलब्ध नहीं है यह ज्योतिर्लिंग ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित है जहां से दक्षिण गंगा कहीं जाने वाली गोदावरी नदी का उद्गम होता है प्रत्येक 12 वर्ष में नासिक के पवित्र पवित्र कुंभ मेला आयोजित होता है जो उज्जैन हरिद्वार और प्रयाग राज की भांति ही है.

नाशिक जैनियों के तीर्थंकर श्री ऋषभदेव गिनीज बुक में दर्ज सबसे ऊंची प्रतिमा के कारण भी स्थापित एक पत्थर से निर्मित यह मूर्ति के मांगीतुंगी क्षेत्र में स्थित है. नासिक के दक्षिण में प्रथम शताब्दी में निर्मित पांडव लेनी गुफा भी आकर्षण का केंद्र है. जो पुरातत्व में रुचि रखते हों उनके लिए हीनयान बौद्ध धर्मावलंबियों की यह 24 गुफाएं व चैत्यदर्शनीय हैं.

अन्जानेरी हिल्स जो 24 किलोमीटर दूर स्थित हैं, परम श्रधेय रामभक्त हनुमान जी का जन्मस्थान मानी जाती है.

नासिक, अंगूर और प्याज की खेती के लिए पूरे भारत में पहचाना जाता है इस क्षेत्र की मृदा उर्वर है और दिन की गर्मी रात की ठंडक के चलते पैदा करने वाली खेती को पूरे विश्व में प्रसिद्ध कर दिया है. नासिक के आसपास बड़े संगठित रूप से अंगूर के पौधे लगाए और पाले जाते हैं जो बीज वाले और बिना बीज के अंगूर पैदा करते हैं. दिसंबर से अप्रैल के मध्य के खेतों में विचरण करना भी अद्वितीय अनुभूति का अहसास कराते हैं. बाजार में बड़ी-छोटी किशमिश / मुनक्का उपलब्ध कराते हैं जो काफी कम दर पर क्रय किए जा सकते हैं. इससे भी बड़ा उद्योग पनपा है नासिक में जहां पिछले 20 साल में अंगूर के प्रचुर खेती के होते वाइन यार्ड या अंगूर की बेटी का आसवन कर मदिरा द्रव का बड़ी मात्रा में उत्पादन किया जाता है जो विदेशों में भी भेजी जाती है. नासिक के पर्यटकों के लिए इन वाइन यार्ड का गाइड टूर किसी आश्चर्य से कम नहीं है जब आपको बताया जाता है कि अंगूर तोड़ने से लेकर वाइन द्रव की बोतल में भरने तक 1 वर्ष का समय लगता है और एक वर्ष के बाद बैरल में निश्चित तापमान और आर्द्रता में वाइन की परिपक्वता सुनिश्चित होती है तो आध्यात्मिक स्पिरिट के साथ साथ नशे के आगोश में पढ़ने वाली स्प्रिट के पकने की प्रक्रिया आपको आश्चर्य चकित कर देती है, मदहोश कर देती है. इस गाइडेड टूर की विशेषता है कि व्यवसाय की गंभीर गहराई का एहसास होने के साथ-साथ मीठी या स्वादहीन या थोड़े तेज स्वाद की वाइन का टेस्ट टूर भी कराया जाता है जो प्रथम बार चखने वालों के लिए तो निश्चित संवेदना लिए होता है.

गर गोटी – आंखों और मस्तिष्क को चमत्कृत कर देने वाला एक निजी संग्रहालय “गर-गोटी” नासिक में प्रथम द्रष्टया लगता है कि पत्थर का संग्रहालय तो क्या होगा? जब आप गाइडेड टूर लेते हैं तो पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न होने वाले पत्थर या गोटी जैसे निर्जीव वस्तु भी हो जाती है जीवन का अनुभव देता है एक पत्थर जो अपने अंदर पानी के दर्शन योग दुर्लभ है तो एक पत्थर नीलम जैसे नीलाभ रचना समेटे है हीरे पुखराज मूंगा माणिक सदस्य रचना नासिक के आसपास के क्षेत्रों में एक जियोलॉजिस्ट के उत्खनन में रुचि संग्रहालय स्थापित हुआ है याद करा देता है कि पत्रों का संसार भी आभा रंग-रूप और सुंदरता से आलोकित है इस निजी संग्रहालय की खूबी यह है कि यह आपके दृष्टि पटल व मस्तिष्क को इतने पत्रों के रूप के इतने सुंदर स्वरूपों से साक्षात्कार कराता है कि आप कहे बिना रह पाते कि वह नाशिक नाशिक वायु मार्ग रेल मार्ग और सड़क मार्ग से मुंबई भोपाल इंदौर नागपुर पुणे हैदराबाद और बेंगलुरु से जुड़ा है और किसी भी सुदी पर्यटक के लिए एक दावत से अधिक है यह जीवंत नगर…..

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