….सद्गति
रहना तू तैयार सदा,
उस अंतिम यात्रा को.
भूल न जाना कभी,
परम हो जाने को.
एक सार होना है कभी,
मिटटी हो जाने दो.
सब छूटेगा कभी ये साथ,
भवलीन होने को.
भले दौड़ो तेज कभी,
भूलो नहीं रुकने को.
माया अनंत संसार परक,
खूब मन लुभाने को.
मद मोह लोभ है क्षणिक,
तुझे भरमाने को.
भोर भई सांझ ढली,
कर्म नित्य प्रति करने को.
समंदर से जा मिली नदी,
सच ये जानने को.
कर्म को मिला ये जीवन,
नियति सदा नियत निभाने को.
सद्गति को चलाचल,
प्रकृति सहेजने को.
मोक्ष का ध्यान सदा,
सृष्टि सदा भरमाने को

Fast Food: Dangerous Affair
Leave a comment