झाड़ उखाड़ हनुमान मन्दिर-
कहीं कोई स्वप्न आए और उस स्वप्न के दिशा निर्देशों से ईश्वर के साकार रूप की स्थापना हो और ईश्वर की उपस्थिति भी चहुं-और जादुई परिस्थितियों से स्थापित हो तो इसे चमत्कार की श्रेणी में रखे जाने का प्रत्येक कारण है …
ऐसा ही एक घटनाक्रम इंदौर के दक्षिण में इंदौर-देवास की सीमा में बागली तहसील के देवनलिया गांव में हुआ.
एक अभिभाषक महोदय को एक रात सपना आया, भगवान हनुमान जी ने कहा कि जंगल में नियत स्थान पर इस दिशा में पूर्व से उपस्थित मूर्ति की स्थापना की जाना है. अभिभाषक जी ने स्वप्न दर्शित चिन्हित स्थान की खोज कर एक चबूतरे पर हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना जनसहयोग से कर दी और पूजार्चन, भजन-कीर्तन होने लगे. घटनाक्रम, वन विभाग की निगाह में था परंतु धार्मिक गतिविधि होने से आपत्ति नहीं हुई. परंतु पुनः स्वप्न उपस्थित हुआ कि इस स्थान पर मंदिर का निर्माण कर श्रीराम-कीर्तन आयोजन किया जाना है. इस पर अभिभाषक स्व. मुरलीधर आर्य द्वारा मंदिर के निर्माण का कार्य आरंभ कराया. स्वाभाविक रूप से सूचना वन विभाग को मिली और उनके दल ने इस कार्रवाई को रोकने का निर्देश दे दिया. जैसे ही काम रुका, न जाने कहां से एक अन्धड़नुमा बवंडर आया और 100 मीटर के नियत दायरे के सारे पेड़ों को उखाड़ कर कुछ इस तरह से पटक दिया जैसे ईश्वर की उपस्थिति हुई और कार्य में बाधा पर रोष प्रकट किया गया. वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी हतप्रभ थे, ये क्या और कैसे हुआ. पता लगाया तो ज्ञात हुआ ऐसा बवंडर और कहीं किसी समीपस्थ इलाके में उपस्थित नहीं हुआ है. प्रभु इच्छा जान, वन विभाग के अधिकारियों ने अनुमति जारी करते हुए इस मंदिर के निर्माण में न केवल सहयोग दिया बल्कि इस मंदिर का नामकरण भी झाड़- उखाड़ हनुमान मंदिर के नाम से किया.
यह घटनाक्रम वर्ष 2002 का है और वर्ष 2003 में मंदिर का पूर्ण निर्माण संपन्न हुआ. इंदौर से 41 किलोमीटर दूर सिमरोल से अंदर जंगल के बीच में स्थित यह पावन एवं सिद्ध मंदिर आपके धार्मिक भावना को छुए बिना नहीं रहता है बल्कि जब आप इस मंदिर की यात्रा करते हैं तो जंगल के बीच में से निकलते हुए तिन्छा-घाटी को छूते हुए जंगल में स्थित उपस्थित जीव-जंतुओं (बन्दर, तरह-तरह के पक्षी, नेवला, लोमड़ी) के दर्शन करते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं तो एक विचित्र आध्यात्मिक अनुभूति होती है और भगवान के दर्शन कर यह भावना बलवती होती है कि कण-कण में भगवान है और इन जंगलों को भी सुरक्षित रखे जाने की आवश्यकता है. रालामंडल होते हुए राऊ तहसील के तिल्लोर खुर्द तथा तिल्लोर बुजुर्ग होते हुए कई गांव पार करते हुए जब आप यात्रा करते हैं तो गांव के खेतों की सोंधी महक, खड़ी फसल के दर्शन, वन -उपज, खेत-खलिहान के साथ-साथ गायों की टोली जंगल में जाते हुए या गोधूलि बेला में जंगल से लौटते हुए भी मिलती है. इससे आपके अंतस को एक विचित्र किस्म की शांत मन की अनुभूति होती है जो न केवल प्राकृतिक अनुभूति है बल्कि आपकी मानसिक एवं शारीरिक तनाव को भी काम करने का सहायक होती है.
मंदिर परिसर अब पूर्णतया पक्का बना हुआ है और दान-दक्षिणा से मंदिर की पूजा – अर्चना साफ सफाई कीर्तन इत्यादि चलते हैं.
बवंडर से उखड़े झाड़ोँ के अवशेष भी सुरक्षित रखे हुए हैं और मन्दिर के द्वार पर ही प्रदर्शित भी हैं. इन दक्षिण मुखी हनुमान के दर्शन करने से सत्य की सदा विजय होती है ऐसी मान्यता है.
Its a dream place to visit for Bird Watchers, Nature Lovers and peace seakers who can find a definite solace in mother nature’s lap in temple or out.



Sir I have visited this place last year but came to know this story today only… amazing search
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