आज मां इस मृत्युलोक में रही नहीं मां, परंतु उनकी संस्कारित शिक्षा आज भी मार्ग प्रशस्त करती हैं.
उच्च स्तर पर “पढ़े नहीं” परंतु जीवन मूल्यों से “गढ़े हुए” सिद्धांत की वाहक मां की अदभुत बातें –
1
हमेशा अच्छी बात बोलना, ना जाने कब नाक के दोनों स्वर एक समान गति में चलें और मानव मुँह से बोला हुआ सच हो जाए इसलिए सदैव अच्छा बोलना
2
कभी भी ब्याज पर कर्ज न लेना
3
दरिद्र की आह कभी न लेना जो ईश्वर की मार में है उस दरिद्र मानव को किसी भी मानव के द्वारा कष्ट देने का कोई हक नहीं है
4
ना जाने कब किस भेष में प्रभु मिल जाएं इसलिए हर व्यक्ति में जीव में ईश्वर तत्व देखना
5
संतोष सदैव रखना तुम्हारे हिस्से का आसमान सदैव खाली होकर मिलेगा
6
ईश्वर पर भरोसा रखना और धन्यवाद का भाव सदैव देना और जो प्राप्त है उसके प्रति भी ईश्वर को कृतज्ञ मानना कि तुम तो इसके भी योग्य न थे
7
साझे में व्यवसाय ना करना क्योंकि साझे की खेती गधे खाते हैं
8
घर जो अतिथी छोटा-बड़ा आए भूखा न जाए याने उसके दिल तक पहुंचो ना पहुंचो, पेट में अन्न का दाना जरूर पहुंचे
9
रहिमन चुप हो बैठिए देख दिनन का फेर, के अनुपालन में खराब समय का आभास हो जाए तो शांत मन से समय निकलने का धैर्यपूर्वक श्रम करना चाहिए
10
पशु का तो चमड़ा भी काम आ जाता है, इंसान का तो परहित में किया गया सहायता का कर्म ही काम आता है
11
बड़े बोल मत बोलिये, न जाने कब पांसा कैसा पलट जाये और वही बोल उल्टे पड़ जाएं
12
कम खाओ, मरो न मुटाओ
13
कभी हाथ फैलाना पड़े किसी के सामने ऐसा कोई काम न करो
14
धोखा कभी न करना कभी भी किसी से भी.
दगा किसी का सगा नहीं
जो न मानो तो कर देखो
जिसने जिससे दगा किया जाकर उसके घर देखो
कलियुग में सतयुग के संस्कार,
विचार कीजियेगा

एकदम सटीक शिक्षा
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