परशुराम जयंती के संदर्भ में आपको आश्चर्य होगा कि भगवान विष्णु जी के इन अवतार का जन्म इंदौर के समीप जानापाव में हुआ था
जानापाव
मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के समीप स्थित जानापाव नामक रमणीय स्थल पर जाना हुआ. यह स्थल विंध्याचल पर्वत शृंखला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है जो 881 मीटर की ऊंचाई पर चारों ओर पहाड़ियों से घिरा ऐतिहासिक स्थल है, जहां मान्यता अनुसार विष्णु रूप भगवान श्री परशुराम का अनादिकाल में जन्म हुआ था. भगवान परशुराम चिरंजीवी अष्ट पुत्रों में से एक है जिम में सम्मिलित है
1 मार्कंडेय
2 हनुमान
3 अश्वत्थामा
4 विभीषण
5 परशुराम
6 वेदव्यास
7 राजा बली
8 कृपाचार्य.
परशुराम के जन्म से संबंधित यह पर्वत शीर्ष दिनोंदिन ऊर्जा से ओतप्रोत है हालांकि जन्म स्थल पर स्थित मंदिर तक सड़क मार्ग बहुत अच्छा बन जाने से पहुंचना सुगम है परंतु इस पर्वत श्रेणी को निहारने का आनंद पैदल चलकर शिखर तक जाने में ही है. जब आप वन क्षेत्र से पक्की डामर रोड पर भी चढ़ते हुए 3 किलोमीटर की यात्रा करते हैं तो कई रमणीक एवं हृदयस्पर्शी दृश्यों के पावन दर्शन होते हैं. हरियाली पर्वतों की श्रेणियों के साथ बीच-बीच में झीलों का दृश्य बड़ा मनोहारी बन पड़ता है. सुबह के समय उगते सूरज जो पहाड़ों के पीछे से अपना आभामंडल लिए प्रकाशित होते हैं जो बड़े सुंदर और दर्शनीय प्रतीत होते हैं और प्रकृति की लीला के दर्शन प्रकृति की अलौकिक सत्ता से आपका जीवंत साक्षात्कार कराते हैं और आप मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रहते हैं. मार्ग में बड़े पत्तों के मध्यम आकार के सागवान के अनगिनत वृक्ष आपको आश्चर्य से भर देते हैं. अभी यह वृक्ष फूलदार हैं और बड़े अद्भुत प्रतीत होते हैं. शांत मन से चलते समय चढ़ते समय आपको भिन्न प्रकार की पक्षियों के दर्शन के साथ-साथ उनकी चहचहाना भी कर्णप्रिय महसूस होगा जो किसी भी राष्ट्रीय स्तर के अभयारण्य की अमूल्य धरोहर होती है. सड़क के किनारे पर लगे छोटे जंगली पौधों में तरह-तरह के पुष्प दर्शन भी आपको होते हैं. विंध्याचल पर्वत की इस श्रंखला में यदि आप ध्यान से देखें तो पर्वत श्रंखला के कटे हुए हिस्से में प्रकृति के मूल रूप से पत्थर पर उकेरे हुए विभिन्न भौगोलिक चित्रों के दर्शन भी होते हैं.
मालवा के पठार पर स्थित जानापाव से ही भारत की एक अनुपम जीवनदायिनी जल रेखा चंबल नदी का उद्गम स्थल भी है… जो जानापाव शिखर के ब्रह्मकुंड से प्रकट होती है. जानापाव पहाड़ी से साढ़े सात नदियां निकली हैं। इनमें कुछ यमुना व कुछ नर्मदा में मिलती हैं। – यहां से चंबल, गंभीर, अंगरेड़ व सुमरिया नदियां व तीन नदियां चोरल, कारम व नेकेड़ेश्वरी निकलती हैं। – ये नदियां करीब 740 किमी बहकर अंत में यमुनाजी में तथा तीन नदिया नर्मदा में समाती हैं।
मानपुर पंचायत व महू अनुविभागीय क्षेत्र के अंतर्गत देवस्थली इंदौर से लगभग 48 किलोमीटर की दूरी पर है तथा आगरा बॉम्बे रोड पर स्थित है. यह बारहमासी जल से आलोकित रहने वाली चंबल नदी यहां उद्गम होने के बाद 965 किलोमीटर लंबी यात्रा पूर्ण करती है तथा उत्तर दिशा की ओर गमन करते हुए धार , उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, कोटा , मुरैना, भिंड होते हुए उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में अपनी यात्रा यमुना नदी में समाहित हो संपूर्ण करती है.
वैसे तो जानापाव, सभी मौसम में जाने योग्य है परंतु बारिश के मौसम में जल से भरे मेघ नीचे के स्तर पर विचरण करते हैं तब जानापाव अपनी सुंदरता से आपका निश्चित मनमोह लेगा. 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा में शिखर तक पहुंचने मैं आप का साक्षात्कार मेघ राशि से होता है तो आपके मानस के सत, रज और तम तीनों निर्मल हो जाते हैं. आपको प्रतीत होता है की यात्रा कितनी प्रीतिकर है और मुझे इस यात्रा के साथ-साथ एक भीतरी यात्रा का भी अनुभव हो रहा है. जानापाव एक पवित्र धार्मिक स्थल है जहां शिव मंदिर के साथ कामधेनु मंदिर धर्मावलंबियों को आकर्षित करता है.
निराकार ईश्वर में विश्वास या नास्तिक भी इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर के दर्शन से अद्भुतं भाव से बंधे बिना नहीं रह पाएंगे….
डॉ अनिल भदौरिया

Thts is still in to do list
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