शून्यता भली, गिनती से

शून्यता भली, गिनती से….


बारिश में रहो
भिगो नहीं
तपन में रहो
जलों नहीं
तनहा भले रहो
लड़ो नहीं
मस्ती में रहो
सहो नहीं
दौड़ते रहो
थको नहीं
यात्रा में रहो
पहुंचो नहीं
आकाश रहो
उड़ो नहीं
जमीन रहो
जुड़ो नहीं
भक्त रहो
चाहो नहीं
उम्मीद रखो
टूटो नहीं
पढ़ो और बढ़ो
रुको नहीं
प्रयास में रहो
समेटो नहीं
प्यार में रहो
डूबो नहीं
प्यासे रहो
तड़पो नही
डूबो भले
उलझो नहीं
तैरते रहो
ललचाओ नहीं
चैतन्य रहो
मगन नहीं
लीन रहो
नशेंमन नहीं
यात्री रहो,
ठहरो नहीं।
शून्यता में रहो
गिनती में नहीं।

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