Defensive Medicine

DEFENSIVE MEDICINE: SPECIALITY OR A STATE OF MIND.. DR ANIL BHADORIA, Indian Medical Association Indore MP Everything can be purchased and so also health and health services. But, Time changed from an old era when health services were scarce and available medical facilities were thin. Scene has changed now and also the Mindset. It is... Continue Reading →

Hospital Nuisance

अस्पताल का दृश्य : आपके इस सरकारी अस्पताल में डॉक्टर साहब सुविधा नाम की चीज नहीं है, स्टाफ आपका बदतमीज है, दवाइयां आपके यहां है नहीं…इसको ताला क्यों नहीं लगा देते हैं ! ( एक असंतुष्ट का उच्च स्वर में प्रलाप) सही कहा आपने, हम बहुत कम संसाधनों में काम कर रहे हैं हमारे पास... Continue Reading →

Threat Unlimited

प्रभुत्व का प्रभाव: पत्रकार:मैं एक राष्ट्रीय अखबार का संवाददाता हूं और आपके सरकारी दफ्तर में यह काम करना चाहता हूं !अधिकारी:डीटेल्स दे दीजिएपत्रकार:यह डिटेल्स है मैं अखबार में हूं .अधिकारी:वह बताने की जरूरत नहीं है अगर आपकी पात्रता है तो यह कार्य बिना अखबार में आपकी पोज़ीशन के विज्ञापन ही हो जाएगा आप बैठिए .... Continue Reading →

Angry yet not Unfriendly!

लघु संवाद -२ मित्रों का संवाद: क्या आप मुझसे नाराज हैं ? हां ! क्या कारण है ? मैं बताना उचित नहीं समझता ! क्यों? क्योंकि आप सदैव से मेरे प्रति सदाशय रहे हैं ! तो अब क्या हुआ ? मुझे कहीं असंतुष्टि है इसलिए मैं नाराज हूं ! तो कारण नहीं बताएंगे ? कारण... Continue Reading →

Government Experience

सरकारी नौकरी और प्रोफेशनल दृष्टिकोण: मेरी बंदूक का लाइसेंस रिन्यूअल में देरी क्यों हो रही है? आपकी लाइसेंस की जांच चल रही है. पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही लाइसेंस का नवीनीकरण किया जाएगा. आप मुझे परेशान कर रहे हैं! नहीं, कार्य की प्रक्रिया है जिसे अभी लागू किया गया है इसमें 10 से 15 दिन... Continue Reading →

Cyber Crime: Beware

साइबर क्राइम के इस दौर में जब प्रत्येक हाथ में एक स्मार्टफोन है, लचीला और सस्ता इंटरनेट का कनेक्शन है तब धोखाधड़ी करने वाले आपराधिक शार्क और मगरमच्छों के बीच आपकी - हमारी स्थिति 32 दांतो के बीच में जीभ जैसी हो जाती है … कि रहना भी साथ साथ है और बचने की कला... Continue Reading →

Discipline at its best!

पुलिस की उपस्थिति नगण्य, परंतु भय अनंत… … व्यक्ति का चरित्र तब परीक्षा पर होता है जब कोई देख ना रहा हो. कदाचित अनुशासन इसे ही कहते हैं, जब स्वयंहित हेतु एक नियमबद्ध दैनिक कार्य पद्धति का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए. जब यह नियमबद्ध दैनिक कार्य- पद्धति समाज व देशहित में हो जाए... Continue Reading →

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