मेघ मल्हारआज रात कितनाजल तुम घर लाएऔर तर करनेतुम सारा जग आयेधीर गंभीर तुमधीरे से आ मुस्काएपौध पेड़ सींचसबको तुम हरसायमेघ तुम देवप्रकृति के पोषक सदासावन भादों भरेकृतज्ञ मुझे होना सदाटप टप बूंदेंगहरे जाती पैठबरस भर काबैकुंठ यही जाता बैठधन्य प्रभु तुमगान मल्हार सदा यूं करतेकोई माने या ना मानेमेघ सदा अपना कर्म करते