पेड़ से गिरी पत्तियों मेंजीवन बिखरा पड़ा हैतने से जुड़ा था कभीआज भू पर छितरा पड़ा है था यूं ऊर्जा से भरपूरआज धरती चूमने कोलीला का अंत करउसके आग़ोश में पड़ा है कहने को मित्र थातने ओ शाखा काग़लबहियाँ के मौसम मेंप्रेम में डूबा पड़ा है सबको अपने सेबड़ा समझता हूँछोटे बना रहने मेंआनंदित हुआ... Continue Reading →