घुमन्तु हकु के किस्से... चम्बल नदी के किनारे, भिंड जिले के बीहड़ों में जमींदारों के राजपूत परिवार में हकु का जन्म हुआ था. अंग्रेजों के शासन काल में डाकू इन बीहड़ों की जीवंत साँस हुआ करते थे. शासन, परिवार, शत्रु से विवाद हुआ की ठाकुर साहेब ने हथियार उठाया और कूद पड़े, चम्बल के आगोश... Continue Reading →
कोई छोड़ता है क्या ……
….कोई छोड़ता है क्या जीवन के रंग हो भले कड़वे, मीठा बोलना, कोई छोड़ता है क्या! सफलता पल्ले आये या नहीं, मेहनत करना, कोई छोड़ता है क्या! ज्ञान गंगा बहे कितनी भी, हास्य करना , कोई छोड़ता है क्या! धन, वैभव, यश हो न हो, परिवार अपना, कोई छोड़ता है क्या! लगती हो कड़वी भले,... Continue Reading →
राजा भोजपाल परमार –
लोकप्रिय राजा, सदा प्रजा के लिए। ये कथानक राजा भोज का है जो परमार वंश के 7वीं शताब्दी दौरान मध्य भारत के शासक थे। राजा भोज का नाम बड़े सम्मान के साथ उनकी न्यायप्रियता, नागरिको की समग्र सेवा ओर सदाशयता के लिए लिया जाता है। आज का भोपाल पूर्व में उनके नाम भोजपाल पर ही... Continue Reading →
यथा प्रणामम
मेरा पहला प्यार.... वो जब मेरे जीवन में आई तो मैं छोटा ही था किंतु वह अति सुंदर, कुलीन ओर विदुषी महिला दिखती थी। मेरा मन उसे देखते ही आ गया उस पर, भर आया मन, कि प्रकृति की कितनी अनमोल सुकृति है यह षोडशी। वह मुझे अपने आगोश में जब लेती तो गर्माहट का... Continue Reading →
झूंठ के पाँव
झूठ के पांव.... दरोगा जी ने डंडा फटकारा, सच बोलो! तुम्हारे आपसी झगडे से परेशान हो गया हूँ. हवालदार बंद करो इनको हवालात में. दो पडोसी, आदतन झगड़ालू, छोटी छोटी बातों पर. शहर के अविकसित क्षेत्र के रहवासी दोनों, देशी दारू पीकर जब तब उलझ पड़ते. जैसे तेरी मुर्गी मेरी तरफ कैसे आई या तुम्हारे... Continue Reading →
मानव मन मलिन….!?
मानव मन मलिन ! ! ! प्रकृति की आत्म कथा. हे मानव..... जो तुम बैठो पास मेरे, हथेली से मेरी घास सहलाओ. और देखो पौधे की पत्तियां, कोई भी एक जैसी कतई नहीं. 1 देखो तुम कलि पुष्प मेरे, किस उत्साह से फूलते महकते. हवा में लहराते झूमते, निकट है अंत, फिर भी रहते मुस्कुराते ... Continue Reading →
जीतना क्षण भर को ……
जीतना क्षण भर को... तुमसे जीत तो नहीं पाउँगा मैं, सोचता हूँ, खुद को जीत लूँ... आगे दौड़ने की चाह बड़ी, हारने की साधना ही कर लूँ... भूख तो कभी शांत न होगी, संतोष का धन एकत्र कर लूँ.. जटिल होना सरल हो कदाचित, त्याग की डगर, सरल कर लूँ... अहंकार... Continue Reading →
आदमी सीधा था !
आदमी सीधा था.... मेरे मरने पर, कहोगे आदमी सीधा था, जैसा भी था थोड़ा ही सही, खरा था. कहोगे, बहुत नुकसान थोड़ा नफा था, मानो ना मानो कड़क मुरमुरा था. कहोगे तुम आदमी, जुबान का कड़वा था कुछ भी कहो सच्ची बात का महामना था मेरे चुप रहने पर कहोगे तुम... Continue Reading →
बाघ के किस्से
बाघ के किस्से दो किस्से सुनाता हूं सीधे बाघ से संबंधित हैं बाघ का एक्स्पोज़र होता है तो इस महामना महा शक्तिमान मानव की क्या स्थिति होती है आपका अंदाज लगेगा... ... चुनाव में ड्यूटी लगी थी विधानसभा की, आज से 20 साल पुरानी बात है, मेरा जोनल ऑफिसर डी.एफ.ओ.(IFS) था. चोरल के आसपास के जंगलों... Continue Reading →
आदित्य आख्यान
आदित्य - आख्यान ...... आदित्य अवलोकनीय, अनिवार्य अर्वाचीन. आसन्न आसंदी पर, अनिल से अवधूत. अरुण से आविर्भाव, अभय अलौकिक. अक्षय आप अविकारी, आभा से आलोकित. आकांक्षा अमृत की, अर्जुन के ओंकार. आलस्य से अछूते अनथक रहे अपार. आसमान के अखरोट, आलेख अनंता. अधार्मिक और अलंकृत आमरे के आनन्दा. अलख के अद्वैतवादी, अष्टावक्र के अभंग. आत्मा... Continue Reading →
सुबह को पैदल चल – अनगिनत लाभ हर पल.
सुबह को पैदल चल, अनगिनत लाभ हर पल डॉ अनिल भदौरिया इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, इंदौर शाखा जीवनशैली रोगों की एक बड़ी श्रंखला ने एक बड़ी संख्या में जवान, बच्चे, स्त्री पुरुष या वृद्ध सभी को थोड़ा या ज्यादा जकड़ लिया है. महंगी होती दवाइयां, उपचार के लिए अस्पतालों का बिल और रोगों की पहचान के... Continue Reading →
LADDAKH :
दर्शनीय लद्दाख: पहाड़ों में सौंदर्य भारत का ग्रैंड कैनियन - लेह का सड़क मार्ग देवभूमि भारत विविधताओं से भरपूर है जहां तीन ओर से समुद्र है तो सागरमाथा हिमालय की गगनचुम्बी चोटियाँ उत्तर से देश की सुरक्षा को प्राकृतिक रूप से उपस्थित है. हिमालय की लम्बी श्रंखला में गजब का सौन्दर्य... Continue Reading →
NARMADE HAR…..
नर्मदा तीरे महेश्वर धाम जब मैं अपने भाइयों के साथ इंदौर के दक्षिण पश्चिम में स्थित 90 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी के तट पर महेश्वर नगर में पूज्य मां के देह त्याग उपरांत अस्थि विसर्जन के प्रयोजन को गया तो ऐसा प्रतीत हुआ कि मां नर्मदा अपने निर्जल मन से पावन जल में मेरी जननी... Continue Reading →
Hello World!
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