भगवन की कहानियां –

भगवान की कहानियां...   भगवान खूब आनंदित रहते हैं परंतु कभी कभी मृत्युलोक की यात्रा को भी उपस्थित होते हैं और मानव को दर्शन भी देते हैं। यहां द्वैत और अद्वैत का प्रश्न त्याग दें तो ईश्वर के दर्शन का लोभ प्रत्येक सुधिमन को सदैव बना रहता है। यह बात और कि प्रभु दर्शन की असीम... Continue Reading →

यमदूत होना …..

यमदूत होना!!  मुझे कुछ नहीं,        यमदूत होना. आत्मा की परम से,        यात्रा होना.  यमदूत का कारज,          चिंतामणि को हरे. ब्रह्मज्ञानी को भी,        परमयोग से भरे.  अज्ञानी को भी,        कुछ यूं थामे.जैसे वज्र पंडित,        चले बैकुंठ धामे.  यमदूत करे शुद्ध,         क्या मानव क्या बुद्ध. मेरा उद्घोष, मैं मुक्त        यम के हत्थे मैं भी बुद्ध. ... Continue Reading →

आज मिली बारिश मुझे रास्ते में  

आज मिली बारिश मुझे रास्ते में   बूंदों के रास्ते, टप टप गिरते, कुछ थोड़ी कुछ तेज होती नशे में. जमीन को, पत्तियों को गीला करती आज बारिश मिली मुझे रास्ते में.  सड़क पर बूंदों का नाच देखते पेड़ खुशी से कहते नाचते में. बारिश का हवन है आनंद, आज मिली बारिश मुझे रास्ते में.  जो... Continue Reading →

माया लीला ….

माया लीला स्त्री माया है तो पुरुषत्व भी माया संसार तो जीवन तत्व भी माया भजनी है या तजनी है कोई समझे ये तो बस बहनी है. बहाव जो रोके तो भ्रम से रहें कोई रमता गया तो कोई लीला में बहे माया उत्तर नहीं, जो है पर कतई नहीं माया प्रश्न नहीं, किंचित वास्तविक... Continue Reading →

पंचेन्द्रिय के सुख

पंच इंद्रिय के सुख... सुख भांति भांति के कर्म से उकेरे जाएं, सुख की राह सी सरपट दौड़ें जाए जीभ पर गुड़ रखो मन गुड़ गुड़ हो जाए जीभ को मीठा लगे हृदय रस को भाये. शब्द जीभ पर आसीन मीठे तो मीठे बोल कड़वे जो वचन कहे तो सुख तजे बिन मोल संगीत की... Continue Reading →

DEFENSIVE MEDICINE – SPECIALITY ? OR STATE OF MIND!

DEFENSIVE MEDICINE: SPECIALITY OR A STATE OF MIND..                                                                       DR ANIL BHADORIA Everything can be purchased and so also health and health services. But, Time changed from a old era when health services were scarce and available medical facilities were thin. Scene has changed now and also  the Mindset. It is expected by all & sundry... Continue Reading →

My Nation

मेरे देश के नाम पाती... संस्कार की धनी, ज्ञान की धाती, प्रेम की धरोहर और मुक्ति की हामी ये देवभूमि मेरी मातृभूमि,आर्याव्रत कहो या भारत या हिंदुस्तान या इंडिया. . . भारत बना है मेरी जन्मभूमि, मेरे पूर्वजन्म के सत्कर्मों से. भारत बना है मेरी कर्मभूमि, मेरी निष्ठां औ मेहनत से. भारत ही बनेगा मेरी... Continue Reading →

Google Doctor

गूगल डॉक्टर – एक अद्भुत विधा डॉक्टर साहब 3 दिन से बुखार है मैंने पहले दिन पेरासिटामोल खा ली थी 2 दिन से बिल्कुल आराम नहीं है तो सोचा आपको भी दिखा दूं. ओके डॉक्टर साहब ने पूरा क्लिनिकल इतिहास जाना, लक्षण पूछे,  शारीरिक परीक्षण किया. रक्तचाप, गले की जांच, पेट की तिल्ली-लीवर पैरों में... Continue Reading →

ओजमयी आलोक

ओजमयी आलोक.... भास्कर कभी रुकता नही, तेज उसका थमता नहीं, एक ओर से चला जाता है, कभी ये रवि, थकता नहीं...1 दिनोंदिन ऊर्जा दान करते, गर्व से दिवाकर, अकड़ता नहीं संत हो दुष्ट हो पंछी-पौधे के पोषण में, भेदभाव ये करता नहीं...2 समंदर का आलोक क्षण भर में भानु भाप बन जाता है बून्द बारिश... Continue Reading →

दो आभूषण

माँ के दो आभूषण.... अस्पताल का प्रांगण ... दुखी, कष्टसाध्य और रुग्ण रोगी की लम्बी श्रंखला... चिकित्सक कक्ष में जारी है जांच और सही जांच के द्वारा रोग की जड़ तक पहुँचने की जद्दोजहद.... तिस पर हरेक को शीघ्रता है कि जल्दी पाने डॉक्टर के पास  पहुंचू. रोगी की शीघ्रता है कि तुरंत उपचार शुरू... Continue Reading →

बादाम सिंह

बादाम सिंह ये किसका एक्स रे है? ....मेरा है. अच्छा , आप हैं बादाम सिंह. क्या करते है? ....पहलवान हूँ. वह तो दिख रहा है! ....क्या मतलब डॉक्टर साब! अरे, दोनों फेफड़े खराब हो रहे हैं. ....हाँ, साब २ महीने से बीमार हैं, भरती कर लीजिये. नहीं दवा खाइए, आराम कीजिये, अभी अस्पताल में भरती... Continue Reading →

विदुषी सुमन….

नवजात पुष्प एक विदुषी महिला. पांडित्य में पारंगत. एम ए हिंदी फिर एम ए संस्कृत. प्राध्यपिका, प्रभु जी की भक्तिन, अनुशासन से भरपूर, सम्मानीय व्यक्तित्व.. लेकिन अति कर्मकांडी. प्रातः ५ बजे उठ, नित्यकर्मो से निपट, प्रथम कर्म बगीचे में आ जाना. सुबह का पैदल चलन और ....और बगीचे के नवजात पुष्पों को तोड़कर अपनी टोकरी... Continue Reading →

Haku: The Nomadic

घुमन्तु हकु के किस्से... चम्बल नदी के किनारे, भिंड जिले के बीहड़ों में जमींदारों के राजपूत परिवार में हकु का जन्म हुआ था. अंग्रेजों के शासन काल में डाकू इन बीहड़ों की जीवंत साँस हुआ करते थे. शासन, परिवार, शत्रु से विवाद हुआ की ठाकुर साहेब ने हथियार उठाया और कूद पड़े, चम्बल के आगोश... Continue Reading →

कोई छोड़ता है क्या ……

….कोई छोड़ता है क्या जीवन के रंग हो भले कड़वे, मीठा बोलना, कोई छोड़ता है क्या! सफलता पल्ले आये या नहीं, मेहनत करना, कोई छोड़ता है क्या! ज्ञान गंगा बहे कितनी भी, हास्य करना , कोई छोड़ता है क्या! धन, वैभव, यश हो न हो, परिवार अपना, कोई छोड़ता है क्या! लगती हो कड़वी भले,... Continue Reading →

राजा भोजपाल परमार –

लोकप्रिय राजा, सदा प्रजा के लिए। ये कथानक राजा भोज का है जो परमार वंश के 7वीं शताब्दी दौरान मध्य भारत के शासक थे। राजा भोज का नाम बड़े सम्मान के साथ उनकी न्यायप्रियता, नागरिको की समग्र सेवा ओर सदाशयता के लिए लिया जाता है। आज का भोपाल पूर्व में उनके नाम भोजपाल पर ही... Continue Reading →

यथा प्रणामम

मेरा पहला प्यार.... वो जब मेरे जीवन में आई तो मैं छोटा ही था किंतु वह अति सुंदर, कुलीन ओर विदुषी महिला दिखती थी। मेरा मन उसे देखते ही आ गया उस पर, भर आया मन, कि प्रकृति की कितनी अनमोल सुकृति है यह षोडशी। वह मुझे अपने आगोश में जब लेती तो गर्माहट का... Continue Reading →

झूंठ के पाँव

झूठ के पांव.... दरोगा जी ने डंडा फटकारा, सच बोलो! तुम्हारे आपसी झगडे से परेशान हो गया हूँ. हवालदार बंद करो इनको हवालात में. दो पडोसी, आदतन झगड़ालू, छोटी छोटी बातों पर. शहर के अविकसित क्षेत्र के रहवासी दोनों, देशी दारू पीकर जब तब उलझ पड़ते. जैसे तेरी मुर्गी मेरी तरफ कैसे आई या तुम्हारे... Continue Reading →

मानव मन मलिन….!?

मानव मन मलिन !      !  ! प्रकृति की आत्म कथा. हे मानव..... जो तुम बैठो पास मेरे, हथेली से मेरी घास सहलाओ. और देखो पौधे की पत्तियां, कोई भी एक जैसी कतई नहीं.                    1 देखो तुम कलि पुष्प मेरे, किस उत्साह से फूलते महकते. हवा में लहराते झूमते, निकट है अंत, फिर भी रहते मुस्कुराते              ... Continue Reading →

जीतना क्षण भर को ……

जीतना क्षण भर को... तुमसे जीत तो नहीं पाउँगा मैं, सोचता हूँ, खुद को जीत लूँ...        आगे दौड़ने की चाह बड़ी,        हारने की साधना ही कर लूँ... भूख तो कभी शांत न होगी, संतोष का धन एकत्र कर लूँ..        जटिल होना सरल हो कदाचित,        त्याग की डगर, सरल कर लूँ... अहंकार... Continue Reading →

आदमी सीधा था !

आदमी सीधा था....  मेरे मरने पर, कहोगे आदमी सीधा था,   जैसा भी था थोड़ा ही सही, खरा था.           कहोगे, बहुत नुकसान थोड़ा नफा था,            मानो ना मानो कड़क मुरमुरा था. कहोगे तुम आदमी, जुबान का कड़वा था    कुछ भी कहो सच्ची बात का महामना था            मेरे चुप रहने पर कहोगे तुम... Continue Reading →

बाघ के किस्से

 बाघ के किस्से   दो किस्से सुनाता हूं सीधे बाघ से संबंधित हैं बाघ का एक्स्पोज़र होता है तो इस महामना महा शक्तिमान मानव की क्या स्थिति होती है आपका अंदाज लगेगा... ... चुनाव में ड्यूटी लगी थी विधानसभा की, आज से 20 साल पुरानी बात है, मेरा जोनल ऑफिसर डी.एफ.ओ.(IFS) था. चोरल के आसपास के जंगलों... Continue Reading →

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