VegMarket

भारत के व्यावसायिक परिदृश्य में अद्भुत बाजार है, सब्जी मंडी का बाजार. इस बाजार में अनुभवहीन और अनुभव से भरे ग्राहक और विक्रेताओं के मानस का वह परीक्षण होता है जो किसी भी वाक्-पटू दंगल से काम नहीं होता है. कभी आप किसी हाट बाजार में लगने वाले इस सब्जी (वाक पटु- दंगल) स्थल में... Continue Reading →

Mahakal Temple

अवंतिका में महांकालेश्वर का नया लीला सौन्दर्य – (यात्रा वृतांत) Dr Anil Bhadoria अनंत काल से संस्कृतियां और मानव-समाज की धार्मिक और अध्यात्मिक अवधारणायें उपस्थित है और संभवतः सर्वशक्तिमान ईश्वर की कल्पना, काल से पूर्व की अवधि से शाश्वत रूप से उपस्थित है. समय से विस्तृत, ईश्वर की परिकल्पना मानव की बुद्धि से परे होने... Continue Reading →

First Train

दोंची बचाई के…. इटावा, बुंदेलखंड और ब्रज खण्ड का जोड़ क्षेत्र है जहां बृज और बुंदेली बोली का प्रभाव देखा जाता है. बोली को परिभाषित करें तो भाषा विशेष की शुद्धता के पांडित्य से विचलन है जो आमजन के संवाद की बोलचाल की भाषा बन जाता है. भाषा का वह स्वरूप जो एक छोटे क्षेत्र... Continue Reading →

Man vs Mind

वायुपुराण में लिखा है- मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना कुंडे कुंडे नवं पय:,जातौ जातौ नवाचारा: नवा वाणी मुखे मुखे. जितने मनुष्य हैं उतने विचार हैं, एक ही स्थान के अलग अलग कुंओं के पानी का स्वाद अलग अलग होता है. एक ही संस्कार के लिए अलग अलग जातियों में अलग अलग रिवाज होता है तथा एक ही... Continue Reading →

God’s Own Stories

भगवान की कहानियां कथानक - डॉ अनिल भदौरिया(पृथ्वी नामक स्वर्ग की यात्रा पर ये देवांश)------------ अलौकिक और सर्वशक्तिमान भगवान खूब आनंदित रहते हैं परंतु कभी कभी मृत्युलोक की यात्रा को भी उपस्थित होते हैं और मानव को दर्शन भी देते हैं। यहां द्वैत और अद्वैत का प्रश्न त्याग दें तो ईश्वर के दर्शन का लोभ... Continue Reading →

Good Deed,Bad Deed

पुण्य प्रश्न, पाप प्रश्न पवित्र माह के आते ही एकाधिक सुधिजन अति कर्मकांडी होते जाते हैं. ईश्वर को मोहित करने को ये मलिन मन, अंतर्मन की यात्रा का बहिर्गमन करते हुए प्रकृति के शुभ आशीर्वाद रूपी फूल पत्ती पौधे पर कुछ यूं झूम जाते हैं जैसे पुष्प समर्पण से ही साकार या निराकार ईश्वर के... Continue Reading →

ShriRam:Real or Story

इंदौर के समाचारपत्र दैनिक भास्कर में 26 अक्टूबर 2003 को प्रकाशित श्रीराम काल्पनिक अथवा वास्तविक के नाम से श्रीमती सरोज बाला (जो उस समय दिल्ली में आयकर आयुक्त थी) के द्वारा लिखा गया है जो यहां प्रस्तुत है - हम भारतीय विश्व की प्राचीनतम सभ्यता के वारिस हैं और हमें अपने गौरवशाली इतिहास एवं उत्कृष्ट... Continue Reading →

Care, small vendor.

……दरी….. दरी ले लो दरी …माताजी दरी ले लीजिए…नहीं भैया, जरूरत नहीं है है हमारे पास.माताजी गलीचा ले लो बेडशीट ले लो तकिए के कवर ले लो …नहीं भैया नहीं चाहिए परेशान मत करो.माता जी थोड़ी सी दया हो जाए… दरवाजे पर खड़ा एक बुजुर्ग जिनकी दाढ़ी भी सफेद हो चुकी थी, घर की मालकिन... Continue Reading →

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