
60 बरस कम नहीं होते
जब आए थे गर्भ में
सोचा सदा रहेंगे छोटे
रोटी पानी छत की दौड़ में
बने रहे हैं भागते इकलौते
कहने को समय सदा शाश्वत है
बीतते समय के कभी पाँव न होते
देख देख काल को अपना समझते
समय बीतता ख़र्चा हम होते होते
उम्र यूं ही दराज़ होती है
ज्ञानी होते हैं कभी खोते
बरसों की बाजीगरी करते
60 बरस कम नहीं होते
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