Truth & Lie

दो सगे भाई की कहानी कुछ इस प्रकार है

एक का नाम सच और एक का नाम झूठ !

जहाँ सच एक सीधा कुलीन और साधु व्यक्तित्व का अधिकारी हो सदैव ख़ुश रह कर प्राकृतिक न्याय के अनुरूप अपनी जीवन यात्रा को सफल करने का प्रयास करता है

वहीं झूठ मलिन विचारधारा और मानसिकता के साथ तेज गति से अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए अपनी वासनाओं के वशीभूत हो, सद्भाव के बिना अपने जीवन को सफल करने का प्रयास करता है.

कहने को तो कहावत है कि जब तक सच को अपनी बात कहने का समय और मौक़ा आता है तब तक झूठ तेज गति से दुनिया का चक्कर लगाकर आ जाता है.

झूठ के साथ एक बात अद्भुत है कि वह अपनी बात को बार – बार, बारंबार इतनी बार कहता है कि सुनने वाले को झूठ ही सच लगने लगता है जबकि सच की सत्यकथन के साथ ऐसा नहीं है. सच अपनी बात जब भी रखेगा हौले से दबंगई से जबकि झूठ का प्रभुत्व चिल्लाकर प्रस्तुत होता है

तब भी सच का कथन सत्य न मानते हुए संदिग्ध श्रेणी में प्रस्तुत हो जाता है!

आपके पास पड़ोस में या अखबार में भी ऐसे दृश्य मिल सकते हैं

विचार कीजिएगा!

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑