Dhurandhar

No Spoiler, Just Movie Review

कहने को तो धुरंधर शब्द का शाब्दिक अर्थ जांबाज शक्तिशाली वीर और बलशाली मेधावी माना जाता है परन्तु देश की सुरक्षा में लगे जासूस की कहानी इस चलचित्र धुरंधर में पहली बार कुछ ऐसा दृश्य प्रस्तुत करती है जो हम भारतीयों के लिए ना केवल आश्चर्य का विषय है बल्कि अविश्वसनीय प्रतीत होता है.

जासूसी उपन्यासों के पढ़ने के दौर में नायक का चरित्र चित्रण कुछ इस प्रकार होता है कहा कि वाह हर कार्य में दक्ष है. परंतु वास्तविकता में जब देश की सुरक्षा से संबंधित विषयों पर देश की सीमा के पार जाकर दूध में शक्कर की तरह घुलकर दुश्मन देश के अतिवादी ताने-बाने को नष्ट करने का यह प्रयोग आधुनिक भारतीय जनमानस के लिए एक प्रथम प्रस्तुति है जो मील का पत्थर साबित होती प्रतीत होती है.

पूर्व काल के चलचित्र आई एस जौहर इन गोवा, अमिताभ बच्चन अभिनीत गोवा के मुक्तीकरण का चलचित्र और धर्मेंद्र अभिनीत चलचित्र आँखें बहूत सतही स्तर पर जासूसी के आधार पर देश हित को सुरक्षित रखने का प्रयास प्रस्तुत करती है. वहीं धुरंधर ने एक सांस्कृतिक स्तर पर जसकिरत सिंह के बलशाली माध्यम से दुश्मन देश की भारत विरोधी धड़ों की सफ़ाई करने के इतने वृहत स्केल पर प्रयास और दर्शकों को न केवल कुर्सी पर बैठे रहने पर मजबूर करते हैं बल्कि मंत्रमुग्ध कर देते हैं

चॉकलेटी फ़िल्मों के दौर के बाद पहली बार धुरंधर – दो के कुछ विशिष्ट दृश्यों की सकारात्मक भाषा और परिणाम पर दर्शकों द्वारा तालियां पीटते हुए देखकर सुखद आश्चर्य भी हुआ. जब इंदौर जैसे बड़े नगर के 20 थिएटरों में 19 march 2026 से सुबह 07 बजे से आरंभ होने वाले चार घंटे के शो के रात ग्यारह बजे तक आरंभ होने वाले शो प्रचालित हो तो इसे मात्र दर्शकों की दीवानगी नहीं माना जाना चाहिए. इस चलचित्र के रोमांचक और खतरनाक कथानक के साथ फ़िल्मांकन लेखन और चैप्टर अनुसार घटना क्रम को संयोजित करने का उपक्रम फूलों की बेहतरीन गुंथी हुई माला जैसा प्रतीत होता है

यह कहने में भी मुझे कोई संकोच नहीं है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के नागरिकों में भी राष्ट्रीयता की भावना का पुष्प न केवल खिला है बल्की पल्लवित हुआ है और बलिदान जैसे जटिल और कठिन मानसिकता के प्रति लोगों में स्वीकार्यता आयी है जो ऐसी फ़िल्मों के माध्यम से बलवती भी हुई है.

पुरानी कहावत है कोई भी सफलता, त्याग के बिना हासिल नहीं होती है और देश की सुरक्षा की जब बात हो तो सीमा पर तैनात बीएसएफ,आईटीबीपी के साथ सुरक्षा में लगे भारतीय सेना के थलचर , जलचर और वायुचर विभागों के जवान, अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ के त्याग और बलिदान की न सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है जो आम आदमी के लिए अत्यंत कठिन है

धुरंधर 2, पूर्व में आई धुरंधर 1 पर इक्कीस बैठती है जो दुश्मन देश पाकिस्तान में जासूसों की प्रविष्टि के माध्यम से भारत विरोधी गतिविधि संचालकों की बाम्बी को अंदर से खोखला करने और नष्ट करने का समग्र दृश्य पैदा करती है. अच्छे भारतीय चलचित्रों की यह ख़ूबी होती है कि अंत होते होते वे ना केवल मन हरिया जाता है बल्कि पैसा वसूल जैसी भावना के साथ देश के प्रति अपने नैतिक कर्तव्यों की भावना का कुसुम कहीं कोने में खिल जाता है

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