Whose Fault?

परिवार की गंभीर बैठक में बड़े बुजुर्ग बैठ पंचायत कर झगड़ा शांत करने की कोशिश कर रहे थे.
आख़िर बड़ा भाई बोल पड़ा,

गलती किसकी ?

माहौल में एक तल्ख़ चुप्पी पसार गई.
बड़े भाई ने कहना जारी रखा.

गलती तो मैं छोटे और मंझली की नहीं मानता. गलती का पुराना विज्ञान है कि सही व्यक्ति ही अपने आपको ग़लत मान सकता है मेरा मानना है गलती मेरी है. गलती क्या है इसकी विस्तृत गहराई में मैं जाना नहीं चाहता!

समाज जनों में सन्नाटा पसार गया.
चुप्पी

यह तय रहा है कि गलती मेरी है और गलती की सजा भी मैं भुगतूँगा! मुझे किसी से कोई परिवाद नहीं है और मैं हाथ जोड़कर अपने सभी अपनों व ग़ैरों से अपनी ग़लती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. आप सभी सदा विजयी हों और मुझे मेरे हाल पर छोड़ दें .

और संपत्ति का हिस्सा? मँझली ने संबंधी के तार टूटने के स्तर तक पहुँचाते हुए कहा.

मेरी और मेरी पत्नी और मेरे बच्चे की इस पैतृक संपत्ति में कोई रुचि नहीं है. मैं अपने परिवार के और से हक त्याग करता हूँ तथा मेरे भाई बहन के इस संपत्ति या अन्य संपत्ति खेत दुकान पर भी हक त्याग करता हूँ जिसे उपयोग करने या कोई विक्रय करने के लिये भी स्वतंत्र करता हूँ.

ऐसा क्यों कर रहे हो, चाचा जी ने कहा!

क्यों? विवाद के बाद मैं अनुजों से सहमत हो रहा हूँ जो मेरा एकाधिकार है

सन्नाटा जारी रहा.

विवाद का विज्ञान कुछ इस प्रकार से है कि एक पक्ष के दूसरे पक्ष से सहमत होने से घोषित युद्ध विराम हो श्रद्धांजलि पूर्वक निस्तेज हो जाता है .

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑