Conspiracy

छोटी सी कॉर्पोरेट कहानी

कुछ ऐसा हुआ जब एक कॉरपोरेट हॉस्पिटल के उच्चाधिकारी ने एक वरिष्ठ चिकित्सक पूछ लिया कि

क्या आप मेरे विरुद्ध साज़िश कर रहे हैं ?

चिकित्सक ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा,

मैं और साज़िश ! किसी के भी प्रति मेरे मन में कोई द्वेष भाव नहीं है आता. साज़िश का तो प्रश्न ही नहीं.
चिकित्सक का प्रत्युत्तर प्रस्तुत हुआ.

मुझे आपके बारे में ये सूचना क्यों मिल रही है कि आप मेरे विरुद्ध है. कॉर्पोरेट मैनेजर ने सवाल की फुलझड़ी को लौ देना जारी रखा.

मेरा विनम्र निवेदन है कि आप के कान के कच्चे होने के लिए मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ परंतु मैं आपके इस कदम की सराहना करता हूँ कि आपने मुझे समक्ष में बुलाकर पूछ लिया.
बिना घबराए चिकित्सक ने सवालों पर साढ़े उत्तर का ठंडा पानी छिड़कना जाति रखा.

अपने बारे में बता देता हूँ कि मैं कर्म के फल के प्रति जाग्रत हूँ और समझता हूँ, जानता हूँ और यह भलीभाँति मेरे मन – मस्तिष्क, भाव , कर्म में सुनिश्चित है कि मैं जो करूँगा वह कर्म मुझ पर लौट कर पुनः आएगा. पुरानी कहावत है karma serves what you have ordered!
तो मेरे पुन्य और पाप की तुला पर पहले से ही अजब संतुलन है और मैं ग़लत कार्य और बुराई का कोई कार्य करने के लिए बिलकुल राज़ी नहीं हूँ. आप इस ग़लतफ़हमी को निकाल दें. मैं गीता पाठी हूँ और मुझे यह मानव जन्म ही नहीं अगला जन्म भी देखना है. अतः आप मेरी ओर से बेफ़िक्र रहे जो भी आपके कानों में मेरे विरुद्ध बात कहता है या मेरे विरुद्ध आप नकारात्मक या सकारात्मक धारणा विकसित कर लेते हैं तो उसके उत्तरदायित्व का भार आपका ही है. मेरी किसी व्यक्ति की लकीर छोटा करने की कोई मानस मंशा मानसिकता नहीं है. मैं “एकला चलो रे “ के अपने सिद्धांत पर चलता हूँ जो आप मेरे कार्य की पुष्टी गुणवत्ता से सुनिश्चित कर सकते हैं. बाक़ी आपने मुझे बुलाया सुनने का मौक़ा दिया मैं आभारी हूँ यदि आप को अनुचित न लगे तो मैं यहाँ काम करना जारी रख सकता हूँ अन्यथा आप कहें तो मैं छुट्टी ले सकता हूँ ताकि आपको मेरी बोली, मेरी शकल या बुरी शकल से रोज़ाना दो – चार न होना पड़े.

इतना कहकर वे वरिष्ठ चिकित्सक आहिस्ता से सम्मानपूर्वक कॉर्पोरेट अस्पताल के वरिष्ठ व्यवस्थापक के कक्ष से बाहर हो गए.

बतलाइए आप कि चिकित्सक ने उचित किया या अनुचित.

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