कार पर लगी पद-पट्टिका का जोश और बचने का संदेश
गाँव, शहर, तहसील, कस्बे से लेकर राजधानी तक सड़कों पर चलती कारों पर पद-प्रतिष्ठा, विभाग- प्रतिष्ठा और डर-प्रतिष्ठा स्थापित करने के लिए आमजन व ख़ासजन दबंग प्रतिष्ठा के प्रदर्शन के हरि, लाल, नीले रंग में अंकित पट्टी की बानगी देखिए-
पूर्व मंत्री, संसद प्रतिनिधि, अध्यक्ष सहकारिता, अधीक्षक चिकित्सालय, पुलिस, न्यायाधीश, मंडल -अध्यक्ष, पंचायत सचिव, सरपंच, प्रधान, अध्यक्ष छात्र संघ जैसे उद्घोष करते चार पहिया वाहन के साथ इस बात की मुनादी करते हैं कि हम से बच के रहियो अन्यथा अंजाम स्पष्ट है. इसको पद-पट्टिका को कोरी धमकी न समझिएगा. इन और पट्टिकाओं से प्रदर्शित परम ऊर्जा तत्वों का अपेक्षित पाठन और संतुलित प्रतिक्रिया की उम्मीद प्रदर्शित करते हैं. वही बचकर निकल जाने का संदेश तो है ही.संदेश भी है कि इस परम ऊर्जा के धनी वाहन को स्थापित यातायात नियमों को शिथिल मानने का अधिकार भी प्राप्त है और सड़क की अधिकृत आधे हिस्से को छोड़कर दूसरे हिस्से पर भी विपरीत दिशा में अपने वाहन का संचालन करने का दुस्साहस करने का डैम भी है. साथ ही वाहनों के प्रवेश निषेध मार्ग में भी वाहन चलाने का अधिकार रखते हैं.
सामान्य नागरिक और सामान्य पुलिस को चुनौती देते ये प्रतिष्ठित नाम या पद-पट्टिका वाहक, समाज सेना के अनमोल प्रतिनिधि समाज की धरोहर हो इस नैतिक दायित्व से पीड़ित होते हैं कि नागरिकों को सड़क पर चलते समय वे वीडियो गेम्स की भाँति सामने से सही दिशा में चलित वाहन के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हैं ताकि वे पूर्णत: अनुशासनबद्ध होकर सीमित गति में वाहन चालन में निमग्न न हो जावें और सचेत रहें. कार, विधायक के भतीजे अथवा पूर्व मंत्री या संगठन मंत्री या भूतपूर्व अध्यक्ष से अंकित वाहन के प्रति सामान्य वाहन सचेत हो अपने मस्तिष्क का अधिकतम प्रयोग करते हुए सड़क से नीचे उतर जाए और इस वाहन को द्रुत गति से प्रस्थान करने दें, मुस्कुराते हुए, सम्मान देते हुए.
वस्तुतः देखा जाए तो ये वाहन स्वयंभू आरक्षण से पीड़ित हैं जो भारत देश की नियमित वैज्ञानिक कला है जिसके तहत विशिष्ठ टैगधारी व्यक्ति अथवा वाहन को समस्त विशेषाधिकार तथा प्रतिरक्षण प्राप्त होती है जिनको देखते हुए साधारण नागरिक को मेंढकों की तरह अपना स्थान का परित्याग कर बचाव हेतु धराभिषेक करते हुए कि सड़क के कच्चे हिस्से में कूदना पड़ता है.
आम नागरिक तो आम नागरिक, इन पट्टिका धारकों के नियमों के उल्लंघन के प्रति शासन-प्रशासन को भी लचीला रूख रखना पड़ता है. यदि यदा-कदा कोई दबंग पुलिस अधिकारी इस वाहन को रोक भी ले तो वाहन सवार की दबंगई और विशेषाधिकार प्रदत्त उच्च भाषा के श्रंगार से क़ानून भी बलवत नतमस्तक हो जाता है. समाज की अनमोल थाती ये वाहन चालक न केवल वैरी इंपॉर्टेंट परसन के वी.आई. पी. होने के घोषित अपितु अमान्य झंडे के अधिकारी हो ईश्वर तुल्य साख के हामी होते हैं बल्कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था मैं यूनेस्को की विश्व धरोहर बने होने का भी दम प्रदर्शित करते हैं.
सच हो कदाचित परंतु यह तो तय है कि शिव के नंदी नुमा उच्च श्रेणी के वाहनों के स्वामी ये नाम पट्टिका धारक समाज के अनमोल रत्न है और इनका सामान्य नागरिक ख़ास नागरिक और सामाजिक हलकों से अनिवार्य सम्मान होना स्वाभाविक ही है.

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