Invisible God!

भगवान जी, दिखते क्यों नहीं ???

यह प्रश्न उचित है परंतु एक दौर था जब भगवान जी, दिखते थे और मानव निर्मित कुछ कहानी ऐसी कही जाती हैं कि भगवान आसानी से दर्शन को उपलब्ध है और किसी भी भक्त को उसका भविष्य भी बता दिया करते थे !

तो 1 बार एक भक्त, जो सुबह दोपहर शाम को भगवान का आभार, प्रेम-प्रार्थना, श्रम-साधना, निर्मल- ध्यान सब करते थे. आव्हान किए जाने पर भगवान जी भी मूर्त रूप में उपस्थित हो दर्शन लाभ दिया करते थे. यह किस युग की कथा हो सकती है इसका निर्धारण करने का निर्णय मैं सुधि पाठक के विवेक पर छोड़ता हूँ.

समय चलते हो वृद्ध हो गए वे भक्त और मृत्युशैया पर पहुँच गए.

उन्होंने एक दिन अपने भगवान का आव्हान किया, हे प्रभु दर्शन देकर मेरे अंतिम प्रश्नों का उत्तर दे दीजिए !

भगवान जब उपस्थित हुए तो भक्त ने कहा था, मैं आपकी सेवा में अनुग्रहित हुआ और आप ने मुझे बड़ा आशीर्वाद दिया और अब मेरा बेटा और बेटी असंस्कारित और नालायक हैं. कुछ ऐसा कर दीजिए कि ये सुधर जायें. इस पर ध्यान से प्रभु ने इनकार करते हुए कहा –
अब कुछ नहीं हो सकता है. ये पूर्वजन्म के कर्मों का फल भुगत रहे हैं.

इस पर भी भक्त ने कहा कि इनका भविष्य को बता दीजिए बच्चे छोटे और नादान हैं?

भगवान इस पर सहमत हुए और बोले कि यह बेटा तुम्हारा चोर बनेगा. यह बिटिया नगरवधू बनेगी!
इतना कह भगवान अंतर्ध्यान हुए.
भक्त तो जैसे अवसाद में चले गए.
पर ऊर्जा समेटकर खड़े हुए और पुत्र और पुत्री को बुला भेजा.

बेटे-बेटी से बोले, तुम्हारे कर्म भाव इस जन्म में मलिन हैं और मेरे अवसान के बाद तुम बेटे मेरे, रोज एक गाय बेचना, कहीं से भी लाकर. सिर्फ़ ऊँचे भाव में ताकि तुम कुछ धन तो जमा कर सको.


और बेटी तुम्हारा यह जन्म नगरवधू बनने का है तो तुम 10000 स्वर्ण मुद्रा लिए बिना कोई सेवा न देना. तो तुम्हारा जीवन धन से उत्तम हो जाएगा.
यह कहकर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए.

अब भक्त की बुद्धिमानी पूर्ण चतुर सलाह से पुत्र रोज एक गाय चुराता और बाजार में ऊंचे भाव पर ही बेचता. इतने ऊंचे भाव पर कोई नहीं खरीदता तो प्रारब्ध देव को ख़ुद उपस्थित होना पड़ता और ऊँचा मूल्य देकर गाय ख़रीदना पड़ती. और चोरी की गाय न मिले तो प्रारब्ध देव को एक गाय उस नालायक पुत्र के दरवाज़े पर बाँधना पड़ती. उसी प्रकार उस नगरवधू बेटी को दस हज़ार स्वर्ण मुद्रा का जिस दिन ग्राहक नहीं मिलता तो प्रारब्ध देव को स्वयं आकर दस हज़ार मुद्रायें देनी पड़तीं.

और यह छल पूर्ण दृश्य देख भगवान बहुत कुपित हुए और भगवान के सरल दर्शन लाभ की मानवीय सुविधा बंद की गई.

कथानक है, विश्वास करना आवश्यक नहीं !

अनिल कुंमार भदौरिया पेशे से चिकित्सक है और मध्य प्रदेश शासन में सेवारत हैं.

स्वास्थ्य शिक्षा के संबंध में चिकित्सक भदौरिया की विशेष रुचि है और जीवनशैली रोगों के प्रभावी उपचार के साथ फर्स्ट एड, यौन शिक्षा व CPR के प्रशिक्षण सत्रों में भी सम्मिलित रहते हैं.

सेक्स एजूकेशन नामक पुस्तिका प्रकाशित हो चुकी है. कवि हृदय डॉ. भदौरिया अपने यात्रा वृत्तान्त और कहानियों के संग्रह की तीन अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं. हेल्दी-बुक नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है.

  1. Sex Education by Peacock Books
  2. दृष्टिदृश्य दृष्टा देवांश – पद्य संग्रह

3.अथ कथा यात्रायाम – गद्य कथा संग्रह

  1. सेक्स शिक्षा – हिंदी में यौन शिक्षा
  2. ज़मीन पर मेरे कदम – यात्रा वृतांत

Books at Amazon link.
https://www.amazon.in/s?k=anil+kumar+bhadoria&ref=sr_gnr_aps

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑