Ashvatthama (511)

मेरे पास अश्वत्थामा संबंधी दो वृतांत प्राप्त है जो कहीं मेरे द्वारा किसी अख़बार में, पुस्तक में पढ़े गए हैं !

प्रथम तो 1930 का है जब रेलवे के स्टेशन मास्टर के पद से रिटायर हुए खंडवा निवासी एक सनातनी को सूझी कि अश्वत्थामा से मिलना है. वे वन-वन भटकने लगे और बुरहानपुर में असीरगढ़ क़िले में एक दिन वर्षों की तपस्या के बाद अश्वत्थामा मिल भी गए. उन्होंने भीमकाय शरीर के स्वामी जिसके माथे से रक्त और मवाद से भरा घाव था, से पूछा आप अश्वत्थामा हो?
उनकी हाँ पर स्टेशन मास्टर ने पुष्टि करने के लिए पूछा, कैसे मान लूँ!
अश्वत्थामा बोले क्या चाहते हो ?
तो महाभारत युद्ध के दर्शन करा देने का अनुरोध किया गे.
अश्वत्थामा ने उन तपस्वी सनातनी के माथे पर हाथ रख महाभारत के 18 दिनों के युद्ध के दृश्य उन्हें दिखा दिये. जब होश आया तब तक ये चिरंजीवी अश्वत्थामा अंतर्ध्यान हो गए थे और इतनी ऊर्जा शरीर में बह जाने से वे स्टेशन मास्टर महोदय अपनी बोलने की क्षमता खो चुके थे. और वे आनंदित हो विकलांग शरीर लिए अपना सेवानिवृति का जीवन बिताए.

दूसरे घटनाक्रम में एक वृद्ध यथा शिक्षित पति-पत्नी से नर्मदा परिक्रमा के दौरान अमरकंटक जबलपुर के समीप उन्हें खाना बनाते समय अश्वत्थामा के दर्शन हो गए थे. 80 के दशक के इस घटनाक्रम में अश्वत्थामा ने दंपत्ति ने खाना माँगा उन्होंने दिया और वे एकदम से अंतरधान हो गए. इस दम्पति को पूर्व से जानकारी थी कि अश्वत्थामा क्षेत्र में भ्रमण करते मिल सकते हैं. यह पूछे जाने पर कि वह कैसे पहचाने जाएंगे तो उन्हें जानकारी दी गई थी कि आप जब किसी विशाल काया को देख स्तब्ध हो जाए और तेज देखकर आंखें बंद होने को आ जाए तो समझ लीजिएगा कि महाभारत काल के मुख्य पात्र में से 1 अश्वत्थामा आपके समक्ष खड़े हैं. ऐसा ही कुछ हुआ जब उन्हें साढ़े नौ फुट ऊँचे दानव जैसे शरीर के स्वामी के दर्शन हुए तो वे समझ गए कि महाभारत काल के मुख्य पात्रों में से एक उनके समक्ष हैं.

अश्वत्थामा के संबंध में यदि आपके पास भी कोई अनुभव, क़िस्सा कहानी सुनाई हुई बात हो तो साझा कीजिए.
सत्य हों कदाचित ये कथानक!

अनिल कुंमार भदौरिया पेशे से चिकित्सक है और मध्य प्रदेश शासन में सेवारत हैं.

स्वास्थ्य शिक्षा के संबंध में चिकित्सक भदौरिया की विशेष रुचि है और जीवनशैली रोगों के प्रभावी उपचार के साथ फर्स्ट एड, यौन शिक्षा व CPR के प्रशिक्षण सत्रों में भी सम्मिलित रहते हैं.

सेक्स एजूकेशन नामक पुस्तिका प्रकाशित हो चुकी है. कवि हृदय डॉ. भदौरिया अपने यात्रा वृत्तान्त और कहानियों के संग्रह की तीन अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं. हेल्दी-बुक नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है.

  1. Sex Education by Peacock Books
  2. दृष्टिदृश्य दृष्टा देवांश – पद्य संग्रह

3.अथ कथा यात्रायाम – गद्य कथा संग्रह

  1. सेक्स शिक्षा – हिंदी में यौन शिक्षा
  2. ज़मीन पर मेरे कदम – यात्रा वृतांत

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