मनी मेला के एक काउंटर का दृश्य-:


10 रुपये के भारतीय नोटों की गड्डी जो अनखुली है और पेटी-पैक है और 70 साल पुरानी है, बेचना चाहता हूँ! एक युवा ने कहा.
और अस्थाई काउंटर पर बैठी पारखी निगाहों ने 10 की इस गड्डी को हाथों में लिया जैसे,
उसका वज़न तोल रहे हों
नर्म हाथों से सहलाया और
अंगूठे की किनोर से नोट की किनोर को मिलाते हुए नोट की गड्डी को फहरा दिया. दक्ष व्यापारी ने गहरे चश्मे की लेंस के पीछे स्थित आँखों को ऊँचा करते हुए पूछा –
कितने में बेचोगे?
बेचवाल का जवाब आया – 50 हज़ार रुपया!
व्यापारी आंखें फिर झुकीं. गड्डी को फिर से सहलाया. नोट की किनौर से अंगूठे की गोलाई से नोटों को तानकर ढीला कर दिया और बोला
सौदा पक्का, काउंटर से 50,000 रूपए ले लीजिए.
कुछ ऐसा दृश्य है इंदौर के गांधी हाल एमजी रोड पर आयोजित इस मनी फेयर के अस्थाई कैनोपी में लगे काउंटर और सिक्कों की, नोटों की और टिकटों की प्रदर्शनी सह व्यापार हो रहा है. यह मेला 15 फ़रवरी तक तीन दिन के लिए आयोजित है और पुस्तक मेले में घुसते ही सामने करेंसी और कॉइन्स की प्रदर्शनी के दर्शन ने मुझे तो आश्चर्यचकित ही कर दिया जब मैंने मुगलकालीन, हूणक़ालीन, मौर्य क़ालीन सिक्कों की प्रदर्शनी के साथ 1 रुपये के नोटों की पुरानी गड्डी, 2 रुपये के नोटों की पुरानी गड्डी, पाँच और दस रूपए, सौ रुपये यहाँ तक कि 1 हज़ार, २००० के नोटों की गड्डियां जो भारतीय करेंसी की है प्रदर्शित थी और इन पुरानी गड्डियां बिक रही थीं और ख़रीद रहे थे व्यापारी.
भारतीय करेंसी नोट मुद्रा के अतिरिक्त विदेशी नोट भी तेज गति से हाथ बदल रही थे. व्यापारी और ग्राहक दोनों की सिक्कों और रोकड़ के सौदा आश्चर्य चकित करने योग्य थे. जिसने मुझे एक नए दौर एक नई विश्व एक नए व्यापार से परिचित करवा दिया .
रास्ते से परिचित मिले मैंने जब उन्हें बताया कि ऐसा ऐसा व्यापार अंदर चल रहा है तो उनका प्रश्न था कि इन गड्डियों की इतनी क़ीमत क्यों है ?
मेरे यह कहने पर वे सहमत हो गए कि कुछ तो लोगों का शौक़ होता है और कुछ शादी- विवाह, मुंडन , सूरज पूजा के संस्कारों में इन छोटे नोटों की गड्डियों का प्रदर्शन कुलीन स्तर को प्रदर्शित करता है

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