जिज्ञासा का विषय हो सकता है कि मोबाइल की स्क्रीन पर चिपके घंटों बीत जाते हैं और नींद दूर बनी रहती है !
ऐसा क्या है मोबाइल में ?
जीवित सेल फ़ोन की काँचनुमा स्क्रीन के भीतर से आने वाली प्रकाश किरणों के विज्ञान में जो मस्तिष्क में नींद उत्पादक कारक तत्वों याने मेलाटॉनिन के उत्पादन को रोक देता है.
दूसरी स्थिति में यह भी जिज्ञासा का विषय हो सकता है कि पुस्तक के माध्यम से कागज़ की मंद स्क्रीन पर लिखा हुआ पढ़ने पर आनन फ़ानन में नींद आ जाती है.
कहीं तो गड़बड़ है?
क्या किताब के कागज़ पर उकेरा गया अलंकार, मेलाटोनिन के मस्तिष्क में कुलबुलाने में सहायक है?

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