Hair Saga

केशों की चिंता यात्रा – मुल्तानी मिट्टी से बोटॉक्स तक

वैसे तो मानव के सिर, कपाल या खोपड़ी की त्वचा पर उपस्थित केश-राशि अपने आप में एक अद्भूत सौंदर्य सम्पदा का प्रतीक है परंतु जिन पुरुषों के सिर पर यह सम्पदा उपस्थित नहीं है, उनके सम्बन्ध में ऐसा माना जाता है कि वे धन-दौलत की अकूत राशि के स्वामी हैं. इसीलिए गंजे पुरुष धनी-मानी माने जाते हैं वही स्त्रियों के संदर्भ में केशों का जितना उत्तम उपचार या रंग करने का उपक्रम किया गया है उससे यह अंदाज़ लगाया जा सकता है कि इस सुंदर केश राशी के सौंदर्य प्रस्तुति के लिए किया गया बड़ा खर्च के माध्यम से समझा जा सकता है कि इस केश-राशि के पीछे कैश-राशि है जो एक धनी-मानी स्त्री का मुख्यालय है.

मनुष्य के शरीर के मुख्यालय मस्तिष्क के अस्थि सुरक्षा कवच के त्वचा आवरण पर उपस्थित केश राशी न केवल सौन्दर्य का प्रतीक है बल्कि व्यक्तित्व के ढांचे को प्रदर्शित भी करता है और बालों के इन्ही सुदर्शन प्रतीकों के कारण स्त्री एवं पुरुष दोनों ही बालों के निर्जीव होने के बाद भी ना-ना प्रकार के उपचारों से साक्षात्कार करते-फिरते हैं. भतेरे उदाहरण प्राप्त हैं जहाँ सम्रद्ध केश राशि की प्राप्ति के लिए भतेरी धनराशि खर्च की जाती है. केरेटिन नामक प्रोटीन की ये कोमल काली राशि केश-धारक या अधारक दोनों को कंचन की भांति कमली याने पागल बनाने में कोई कसर नहीं छोडती है.

जहाँ पुरुषों के मुख्यालय की केश सौन्दर्य का प्रश्न आता है तो पुरुषों के एक बड़े प्रतिशत को प्रकृति ने युवावस्था में उर्वर कपाल से बंजर भूमि बनाकर बालों के झड़ जाने का विचित्र प्राकृतिक श्राप दिया है. इस अदर्शनीय कष्ट से मुक्ति पाने के लिए पुरुषों द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक और मेडिकल उपचार के माध्यम से गंजेपन से बचने के प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं स्त्रियों के संबंध में केश-कलश को सुघड़ सौन्दर्य से भरपूर बनाए रखने के लिए मुल्तानी मिट्टी के ज़मीनी, सस्ते, प्रभावी और सबसे सादे उपचार से लेकर उच्च स्तरीय बोटॉक्स और केरेटिन के अत्यंत महंगे उपचार की एक ऐसी लंबी श्रृंखला उपलब्ध है जो पुरुषों को दांतों तले न केवल उंगली दबाने के लिए मजबूर कर देती है बल्कि जलन का एक भाव भी उत्पन्न करती है.

युवा बहू,बेटी, बहन अथवा बुजुर्ग माँ, दादी, नानी भी अपनी केश-काया के कंचन के कायाकल्प को सदैव उत्सुक रहती हैं. क्या अमीर और क्या दरिद्र, शहरी या ग्रामीण, कामकाजी हो या घरेलु कार्य में दक्ष महिलायें अपने केश सौन्दर्य के लिए एक लंबी देशी श्रृंखला में मेहँदी, दही, अंडा, बेसन, मूल्तानी मिट्टी,शीकाकाई, ज़माने भर के एंटी-डैंड्रफ शैंपू और तेल इत्यादि इन निर्जीव बालों के खाद्य पदार्थ बनते है. यहाँ तक कि गावों और झुग्गी झोपड़ियों में भी लाडली बहना योजना से प्राप्त राशि का एक हिस्सा केश सज्जा में खर्च किया जाता है, ऐसी भी खबर है.

बालों की जड़ों को पौष्टिक भोज्य पदार्थ उपलब्ध करने के लिए भी विटामिन, मिनरल और सूक्ष्म तत्वों का सेवन भी स्वम्भू उपचार का हिस्सा अनादिकाल से बना हुआ है. काले रंग के अलावा विभिन्न विचित्र रंगों से बालों की एक लट से लेकर ही बालों के समस्त झुरमुट को एक स्वान्त: सुखाय का अलबेला रंग देने की भी कवायद भी पूरे विश्व में न केवल स्त्रियों को भी आत्म संतोष की और संतुष्टि का भाव उत्पन्न करने में सहायक है बल्कि निश्चित रूप से वृहद मानसिक राहत एवं वैश्विक स्तर पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराती है.

कपाल पर केशों की उपस्थिति उस बग़ीचे की भांति है जिसे निरंतर स्वच्छता और कटाई-छटाई, निराई- गुड़ाई के बहुमूल्य एवं मेहनती उपायों के साथ उपचारित किया जाना लगभग दैनिक रूप से अनिवार्य होता है ताकि केश समूह का कोई एक भी बाल अपनी समुच्चय लंबाई से आगे न बढ़ने पाए.
सुदर्शन बालों का ही मानव मस्तिष्क में वह अद्भुत स्थान है कि यदि बाल झड़ने लग जाए अथवा झड़ जायें तो प्लास्टिक सर्जन की सलाह की दौड़ आरंभ हो जाती है कि जहाँ कहीं अच्छे बाल बचे हैं उनको निकालकर इस टकले होते सिर पर माइनर शल्य चिकित्सा के माध्यम से पुनः स्थापना कर दें ताकि ये नई बंजर भूमि पर उग जायें और बालों की फसल लहलहा जाए. किस्से तो ऐसे भी हैं कि गंजे सिर को गाय की जिह्वा से चटवा लिया गया ताकि त्वचा खुरदुरी हो जाएं और बाल उपजा जायें.

सुदर्शन नैन-नक़्श के धनी हों तो बालों का महत्व और भी बढ़ जाता है जो एक फोटो फ्रेम जैसा चित्र प्रस्तुत करता है जिसके माध्यम से फिल्म इंडस्ट्री के चित्रपट चेहरे की प्रस्तुति का लोभ द्विगुणित होते चलता है. जहाँ बालों की स्थापना के लिए सर्जिकल क्लीनिक, साज-श्रृंगार के लिए पारलर, बार्बर का प्रभाव है तो वहीँ एक बड़ा बाजार विग का भी है.
सिर पर बालों न होने की स्थिति में कृत्रिम केश राशि याने विग चिपकाने का आधुनिक चलन भी प्रभावी है.

हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक अभिनेता, अभिनेत्री, टीवी प्रस्तोता सभी स्वीकार योग्य सुंदर प्रस्तुति के लिए विग का प्रयोग अनिवार्य रूप से करते हैं. इतने उच्च स्तर की महँगी विग का बाजार उपलब्ध है जो कपाल के केश-विहीन त्वचा के ऊपर इस ज़बरदस्त प्रकार से चिपक कर आलोकित होती है कि ध्यान से न देखा जाए तो वे असली बालों को भी मात करती हैं. विग का जितना प्राकृतिक बालों के समीप होगा उतना ही मूल्य अधिक होगा इसीलिए विग भी व्यक्ति के धनी-मानी होने का प्रतीक है.

बालों की यह लीला अपरम्पार है, घने बाल हैं तो उनकी साज संभाल भी नित्य कर्म है. कम मात्रा में बाल हैं तो उन बालों को सहेजकर बचाए रखने की कवायद जारी रहती है और यदि बालों का सर पर नितांत अभाव है तो बालों को पुनः प्राप्त करने की प्रयास जारी रहते हैं. बालों का विज्ञान मृदा विज्ञान की भांति है जो बंजर हो जाए तो विचार का विषय है और ख़ूब उर्वरकता हो तो साज संभाल का विषय है, केश का वृहत्तम उत्पादन तो हो ही जाएगा.

इति केश गाथा.

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