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गलती का विज्ञान – मेरी गलती तो बिलकुल नहीं
डा. अनिल भदौरिया


अरे सुनो, ध्यान से फर्निचर का काम करना, गलती ना होने पाये.

बस यहीं इसी बिंदु पर मेरे द्वारा लकड़ी के करीगर, बढ़ई को कहते ही कि गलती ना हो पाए, गलती जो जहाँ कहीं भी रहती है…सीधी-उलटी, टेढ़ी-मेढ़ी, दबी-दमित, मैली-कुचली, शोषित-पीड़ित, आरक्षित या अनारक्षित अपना हक जान बिना बुलाये आन खड़ी होती है कि बोला तो बोला कैसे, कि गलती ना हो पाए. अब तो ये मेरा नैतिक दायित्व है कि मैं हो के ही रहूँ और रूप- हानि, धन-हानि, मान-हानि करके रहूँ. विश्वास करें ना करें, गलती के बड़े कान होते हैं जो जुबान से निकलते या मन में विचार की फुसफुसाहट भी सुन लेती है. वहीं दूसरी ओर सही काम बहरे हो सकते हैं जो आसानी से आदर्श स्थिति को प्राप्त हो ही नहीं सकते हैं.

गलती रानी का त्रुटी विज्ञान, सही कारज करने के आदर्श विज्ञान की असंतुष्ट चचेरी सौतेली बहन जैसा प्रतीत होती है जो सदैव सही विज्ञान के धार्मिक, अध्यात्मिक, कलात्मक, वैज्ञानिक या सात्विक कार्य को करते दूर से खड़ी-खड़ी देखती रहती है. गलती रानी को कभी कोई निमंत्रण कभी भी नहीं भेजा जाता है परंतु गलती तो बस सौतेली हो दूर खड़े होंगे वसीयत में अपने हिस्से के न होने के बाद भी उपस्थित होने के मौके की प्रतीक्षा में खड़ी रहती है.

जहाँ कहीं भी drकिसी कार्य में कहा गया कि संभाल के करना, ध्यान से, बच के, बचा के, कि गलती रानी के कान खड़े हुए कि बुलावा अब आया कि तब आया. और जैसे ही किसी ने कहा कि गलती कर रहे हो तो गलती आन खड़ी होती है. गठित हो जाती है सजी-संवारी, कुटिल मुस्कान के साथ विद्रूप भाव-भंगिमा सहित कार्य बिगाड़ने को बिना बुलाये सिर्फ जिक्र मात्र भर कर देने से. और कभी-कभी तो मन में विचार कर मात्र कर लेने से कि चौके के चूल्हे पर धीमी आंच में रखा दूध कहीं उफन न जाए यानी गलती देवी ने सुन ही लिया और दौड़ पड़ी गलती रानी इतनी तीव्र गति से कि किचन में चूल्हे के सामने आपके खड़े रहने पर भी दूध तो बस उफन ही गया है.


गलती भले अलंकृत हो, त्रुटि, चूक, भूल या खता जैसे नाम रख ले गलती रानी का चरित्र उचित या आदर्श विधि या मेथॅड से अलग करने का ही है. गलती अमूमन लापरवाही, ध्यान भटकने, क्रोध या लगातार चिढ़ने या अतिमोह अथवा लोभ की मिट्टी पर उत्पन्न होती है. निगाह हटी – दुर्घटना घटी के ठंडे मीठे पानी का स्वादिष्ट पौष्टिक प्राप्त होता है. ध्यान की केंद्रता बनी रहे तो गलती को स्थान नहीं मिलने पाता है जो गलती का दुश्मन है जो सही काम, सही प्रकार से सही समय पर कार्य संपन्न करने को प्रेरित करता है. जरा सा ध्यान हटा तो गलती की कुरूप-रानी ने होटल के कमरे में जैसे चेक-इन करा.

जैसे स्थापित खिलाड़ी के बल्ले की किनारे से छूती हुई गेंद दास्तां में समाते ही गलती की उपस्थिति सिद्ध कर देती है. जहाँ ध्यान का कार्य करने की उत्तम प्रणाली से चोली-दामन का साथ है वहीं लापरवाही का गलती रानी से चोली-दामन का साथ प्राचीन काल से है. यहाँ तक कि सतयुग में भी भगवान शिव के भस्मासुर को जिसके सिर पर हाथ रख दो तो वो भस्म हो जाए जैसी वरदान देने की गलती से भी जुड़ा हुआ है. शिव जैसे सुधि सन्यासी भी गलती के शिकार हों जाएँ उसी से प्रतीत होता है गलती सर्वोपरि होने को सदैव तैयार है.


गलती प्रत्येक जीव मात्र का कार्बन डाइऑक्साइड है जिसे परे रखना प्रत्येक मानव का भी निज कर्म है. परंतु ऑक्सीजन के साथ वायुमंडल में गलती का वातावरण भी भरा पड़ा है. पसंद है आपकी, जिसे चाहो, गलती से अपना बचाव कर लो या शिकार हो जाओ. गलती का विज्ञान इतना चतुर है कि जैसे ही कर्मकर्ता या कार्यकर्ता के पल्ले गलती अंकित हो जाती है तो वह यह गलती दूसरे पर ढोलने को तत्पर होताहै. चाहे तुम जो मानो गलती मेरी है ही नहीं है.

ये भाव अवतरित हो जाता है जैसे आग लगाकर गलती-रानी दूर खड़ी हुई. और यह गलती फिर दूर खड़ी हो मान- मनोव्वल या फिर सिर-फुट्टोवल, अपमान, आर्थिक-सजा, श्रम-सजा का घनघोर नाटक देखती रहती है. गलती होकर भी अनजान है और कपट प्रतीक कराने का प्रयास करती है . बच सको तो बचो.

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