Medicines & Alcohol

Blog No. 471

किसी भी शाम को नगरों के बाजार, क़स्बे, गली – आँगन का रुख़ करें तो भारतीय समाज की भीड़ दारू की दुकान और दवाई की दुकान पर झूमती मटकती झूलती दिखाई देती है.

एक प्रकार की दुकान जो औषधीय व्यवसाय से अस्वस्थ लोगों का अमृत है तो दूसरी प्रकार की दुकान सुरा रूपी दवाई की दुकान है जो कुछ स्वस्थ लोगों के लिए शुद्ध अमृत है.

दवा और दारू शब्दों का हमारे बोलचाल की भाषा में इतना प्रयोग होता है कि दवा को दारू की भाँति सेवन में तथा दारू को दवा की भाँति सेवन में लेने की आदत बनाने में देर नहीं लगती है.

औषधि या दवाई की परिभाषा को समझा जाए तो औषधि वह रासायनिक पदार्थ है जो शरीर या मन में बदलाव लाता है. औषधियों का प्रयोग बीमारी को दूर करने, रोकने, या निदान करने के लिए किया जाता है. औषधि की परिभाषा में सम्मिलित है कि हर वह पदार्थ जो उचित मात्रा में स्वास्थ्यवर्धक है वही अधिक मात्रा में विष है.

शराब के हिस्से में भी यह तत्व है कि कभी कभी कम मात्रा में यह स्वास्थ्यवर्धक हो सकती है तो अधिक मात्रा में यह शरीर के हर अंग के किए हानिकारक है.

अंतर भी है कि दवाई को उपचारक क्षमता धीरे धीर कम होती जाती है और अवसान तिथि उपरांत औषधि असरकारक नहीं रह जाती है. जबकि दारू जितनी पुरानी होती जाती है उतनी अधिक असरकारक होती जाती है ….

आश्चर्य है ना!

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